मानसून सीजन समाप्त, देश में 13 फीसदी कम बरसे बादल

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डेस्क  : देश में चार महीने चलने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो गया। इस बार देश में सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर के बीच देश में 759.4 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि का दीर्घकालिक औसत 868.6 मिमी है। बारिश की यह कमी इस साल के मानसून को 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर मानसून बनाती है।

जून में सबसे ज्यादा कमी, जुलाई में मिली राहत

मानसून के दौरान बारिश का वितरण असमान रहा। जून में बारिश सामान्य से करीब 35 फीसदी कम रही। जुलाई में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ और यह लगभग सामान्य रही, लेकिन अगस्त और सितंबर में फिर कमी दर्ज की गई। इससे कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रही, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश और जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।

क्षेत्रीय स्तर पर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से करीब 25 फीसदी कम, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में करीब 24 फीसदी कम रही। उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश सामान्य से कम रही, जबकि मध्य भारत में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।

एल नीनो का भी रहा असर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल कमजोर मानसून के पीछे एल नीनो परिस्थितियां भी एक प्रमुख कारक रही हैं। एल नीनो के कारण प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिसका असर भारतीय मानसून पर पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक मौजूदा एल नीनो नवंबर के आसपास चरम पर पहुंच सकता है और इसके बाद धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है।

रबी फसलों की बुवाई पर नजर

कम बारिश का असर अब रबी फसलों की बुवाई पर भी पड़ सकता है। मिट्टी में पर्याप्त नमी और जलाशयों में पानी की उपलब्धता गेहूं, चना, सरसों सहित अन्य रबी फसलों के लिए महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, इसका प्रभाव सभी राज्यों और फसलों पर एक जैसा नहीं होगा, क्योंकि मानसून के दौरान बारिश का वितरण अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रहा है।

अक्टूबर में भी कम बारिश का अनुमान

मानसून की विदाई के बावजूद अक्टूबर में बारिश पूरी तरह खत्म नहीं होगी। IMD के अनुसार, अक्टूबर में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। देशभर में बारिश दीर्घकालिक औसत के 85 फीसदी से भी कम रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

दिसंबर तक कम बारिश की संभावना

अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भी देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इस दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना बनी हुई है।

कमजोर मानसून के बाद अब रबी बुवाई, मिट्टी की नमी, जलाशयों में पानी और आने वाले महीनों की बारिश पर नजर रहेगी। इन परिस्थितियों का असर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।