ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन में विपक्ष एकजुट क्यों नहीं? कांग्रेस ने बनाई दूरी

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डेस्क : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। जहाँ आम आदमी पार्टी और वामपंथी दल इस आंदोलन के समर्थन में उतर रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने इससे दूरी बनाकर अपनी अलग राजनीतिक रणनीति के संकेत दिए हैं। विपक्षी एकजुटता के दावों के बीच यह घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में दस अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है। प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।

कांग्रेस की दूरी ने बढ़ाए राजनीतिक सवाल

कांग्रेस पहले से ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाती रही है। इसके बावजूद पार्टी का इस प्रदर्शन में शामिल नहीं होना कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चेन्नई में निर्धारित कार्यक्रम को भी इस घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कांग्रेस का अलग रहना विपक्षी दलों के बीच आंदोलन के नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेदों की ओर संकेत कर सकता है। हालाँकि, पार्टी के इस रुख के पीछे के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।

आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों का समर्थन

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य वामपंथी संगठनों ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी समर्थन के संकेत दिए गए हैं।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच सहमति होने के बावजूद विरोध दर्ज कराने के मंच और तरीके को लेकर एकराय नहीं बन पा रही है।

विपक्षी एकता की फिर होगी परीक्षा

इससे पहले भी कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलनों को आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस का समर्थन मिला था। अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन ने विपक्षी एकता की वास्तविक स्थिति पर बहस तेज कर दी है।

राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस का इस प्रदर्शन से अलग रहना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या विपक्ष चुनाव आयोग के मुद्दे पर साझा रणनीति बना पाएगा या अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने मंच से सरकार और चुनाव आयोग को चुनौती देते रहेंगे। आने वाले दिनों में विपक्षी दलों का रुख इस राजनीतिक तस्वीर को और स्पष्ट कर सकता है।