डेस्क : ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ संघर्ष फिर शुरू होने की स्थिति में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उनका देश किसी भी तरह की नई आक्रामक कार्रवाई का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान जरूरत पड़ने पर ‘‘डूम्सडे वॉर’’ यानी बेहद विनाशकारी युद्ध के लिए भी तैयार है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान कूटनीति के जरिए शांति का रास्ता तलाशने के लिए तैयार है और अब यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करना है।
एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ को दिए साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका के मध्यावधि चुनावों की चिंता नहीं है। उसका ध्यान अपने राष्ट्रीय हितों पर है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति में दृढ़ता से मुकाबला करेगा, लेकिन शांति के किसी भी अवसर को गंवाना नहीं चाहता।
अराघची ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज किए जाने की जानकारी अभी तक तेहरान को आधिकारिक राजनयिक माध्यमों से नहीं दी गई है। उन्होंने दोहराया कि ईरान बातचीत के जरिए समाधान होने की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है।
ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, तेहरान की मांग है कि विदेशों में कथित तौर पर अवैध रूप से रोकी गई उसकी संपत्तियां और धनराशि जारी की जाए तथा उसे अपना तेल बेचने की अनुमति मिले। उन्होंने कहा कि ये शर्तें जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम संबंधी समझौते में भी शामिल थीं, लेकिन उसके कुछ समय बाद दोनों पक्षों के बीच हमले शुरू हो गए थे।
अराघची ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भी कूटनीति का रास्ता छोड़ना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक, शांति की हर संभावित कोशिश को मौका दिया जाना चाहिए।
अमेरिका ने प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य
इससे पहले ‘मीट द प्रेस’ में अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने ईरान के सात दिन के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि इसके पीछे कई कारण हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच और प्रतिबंधों में राहत की मांग की गई थी, जिसे अमेरिका स्वीकार नहीं कर सकता।
वॉल्ट्ज ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं के बाद अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ किसी भी समझौते को लेकर सतर्क है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति सभी विकल्प खुले रखेंगे।
सात दिन का प्रस्ताव
ईरान के विदेश मंत्री ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कहा था कि तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने सात दिन की योजना रखी है। इसके तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत व्यापक मुद्दों पर बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था।
अराघची ने कहा था कि यह प्रस्ताव जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की तर्ज पर है। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव से पहले किसी समझौते पर पहुंचना बेहतर होगा।
ट्रंप ने प्रस्ताव ठुकराया
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने से जुड़े प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। ईरान के सरकारी मीडिया से जुड़े स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क के मुताबिक, ट्रंप ने प्रस्ताव पर स्पष्ट असहमति जताई और कहा कि ईरान तत्काल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए समझौता चाहता है।
ईरानी विदेश मंत्री के ताजा बयान और अमेरिकी प्रशासन के रुख से संकेत मिलता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, आर्थिक प्रतिबंधों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।







