जनगणना 2027 में जाति की भी होगी गणना, 11 नए सवालों के साथ बदलेगा तरीका

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नई दिल्ली :  देश में जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने जनसंख्या गणना के दूसरे चरण का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस बार जनगणना की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विस्तृत होगी। इसमें नागरिकों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि वर्ष 2011 की जनगणना में 29 सवाल शामिल थे। यानी इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं। खास बात यह है कि इस बार जनगणना में जाति से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत 10 जनवरी 2027 से होगी। इस दिन से 24 जनवरी तक नागरिकों को ऑनलाइन स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा मिलेगी। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे। एक मार्च 2027 को जनगणना की संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है, जबकि एक से पांच मार्च तक संशोधन की प्रक्रिया चलेगी।

चार राज्यों में पहले होगी जनगणना

अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में जनगणना का कार्यक्रम पहले निर्धारित किया गया है। इन चारों राज्यों में घर-घर जाकर जनसंख्या गणना का कार्य 35 दिनों तक चलेगा। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, इन राज्यों में स्व-गणना और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया के लिए अलग समय-सारणी तय की गई है।

जाति और परिवार से जुड़े सवाल भी होंगे शामिल

इस बार जनगणना में जाति से संबंधित जानकारी के साथ पति या पत्नी का नाम, माता-पिता का विवरण, व्यक्ति की घोषित राष्ट्रीयता और स्थायी पते से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। इसके अतिरिक्त कोविड-19 टीकाकरण की जगह और परिवार के कुल बैंक खातों की संख्या की जानकारी भी जुटाई जाएगी।

जनगणना के दौरान मोबाइल नंबर, आधार नंबर, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित जानकारी भी दर्ज करने का प्रावधान है। मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी की जानकारी उपलब्ध होने पर दी जा सकेगी, जबकि पासपोर्ट नंबर केवल भारतीय पासपोर्ट धारकों से मांगा जाएगा।

2011 में हुई थी पिछली जनगणना

देश में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। उस समय देश की कुल आबादी लगभग 121 करोड़ दर्ज की गई थी। वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोरोना महामारी के कारण नहीं हो सकी थी। अब 2027 की जनगणना के माध्यम से देश की नई जनसंख्या और सामाजिक संरचना से जुड़े आंकड़े सामने आएंगे। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य की सरकारी योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यक्रमों के निर्धारण में महत्वपूर्ण साबित होगा।