हिंदू धर्म और गौ पूजा पर टिप्पणी से विवाद, रब्बी योसी मिजराही की आलोचना

0

डेस्क : हिंदू धर्म और गौ पूजा की परंपराओं को लेकर इजरायली-अमेरिकी यहूदी धर्मगुरु रब्बी योसी मिजराही की विवादित टिप्पणी के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल होने के बाद भारत और इजरायल सहित कई देशों में लोगों ने नाराजगी जताई है। मिजराही ने वीडियो में हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं, गोमूत्र और भारतीय डॉक्टरों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।

वायरल वीडियो में मिजराही ने भारत में रहने वाले एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए दावा किया कि उसके परिवार के सदस्य गाय की पूजा करते हैं और उसके सामने झुकते हैं। उन्होंने हिंदुओं को लेकर गोमूत्र के सेवन से संबंधित कई दावे भी किए। इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीय डॉक्टरों को भी अपनी टिप्पणी का निशाना बनाया और दिल्ली की सड़कों पर घूमने वाली गायों को लेकर व्यंग्य किया।

इजरायली शोधकर्ता ने भी जताई नाराजगी

मिजराही की टिप्पणियों पर भारत में रहने वाले इजरायली लेखक और शोधकर्ता येशाया रोसेनमैन ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने मिजराही के बयानों की आलोचना करते हुए इसे गंभीर मामला बताया।

वहीं, भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शवेश ने भी धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने वालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नस्लवाद मानवता के लिए खतरा है। किसी भी धर्म या विश्वास के लोगों की आस्था का मजाक उड़ाना और उनकी धार्मिक परंपराओं का अपमान करना मानवता की साझा नींव को कमजोर करता है।

पहले भी विवादों में रहे हैं मिजराही

इजरायल में जन्मे और अमेरिका में रहने वाले योसी मिजराही ऑर्थोडॉक्स यहूदी धर्म के प्रचारक हैं। वह ‘डिवाइन इन्फॉर्मेशन’ नाम से एक ऑनलाइन धार्मिक मंच भी चलाते हैं। इससे पहले भी उनके कई बयान विवादों में रहे हैं।

वर्ष 2015 में उन्होंने होलोकॉस्ट में मारे गए यहूदियों की संख्या को लेकर गलत दावा किया था। इतिहासकारों ने उनके दावे की आलोचना की थी, जिसके बाद उन्होंने माफी मांगी थी। इसके अलावा ऑटिज्म और डाउन सिंड्रोम को लेकर उनकी टिप्पणियों पर भी विरोध हुआ था। वर्ष 2016 में 16 ऑर्थोडॉक्स यहूदी रब्बियों ने उनके प्रचार के तरीकों और बयानों की आलोचना की थी।

ताजा विवाद ने एक बार फिर धार्मिक आस्थाओं के प्रति सम्मान, आपसी सहिष्णुता और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार बयानबाजी की आवश्यकता को चर्चा में ला दिया है।