काजल-लिपस्टिक लगाने और देर रात जागने को मानसिक बीमारी मानना गलत: हाईकोर्ट

0

डेस्क : झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आधी रात को काजल और लिपस्टिक लगाना या देर रात तक सजना-संवरना अपने आप में मानसिक बीमारी या असामान्य व्यवहार का प्रमाण नहीं है। अदालत ने इन आधारों पर पत्नी को मानसिक रूप से बीमार मानने से इनकार करते हुए तलाक देने की मांग खारिज कर दी।

मामले में पति की ओर से पत्नी के व्यवहार को लेकर कई आरोप लगाए गए थे। पति का दावा था कि पत्नी का देर रात तक जागना, आधी रात में काजल और लिपस्टिक लगाना तथा उसके व्यवहार में कथित बदलाव मानसिक अस्वस्थता की ओर संकेत करता है। इन्हीं आरोपों के आधार पर पति ने विवाह विच्छेद की मांग की थी।

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति का सजना-संवरना या देर रात तक जागना मात्र इस बात का आधार नहीं हो सकता कि वह मानसिक बीमारी से पीड़ित है। मानसिक बीमारी या असामान्य मानसिक स्थिति साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं। केवल व्यक्तिगत आदतों या व्यवहार को आधार बनाकर किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बीमार नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि वैवाहिक संबंधों में मतभेद और व्यक्तिगत आदतों को मानसिक बीमारी से जोड़कर देखना उचित नहीं है। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद पति को तलाक देने से इनकार कर दिया।

अदालत के इस फैसले को वैवाहिक विवादों में मानसिक बीमारी के आरोपों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले में यह संदेश भी सामने आया कि किसी व्यक्ति के सामान्य व्यवहार, पहनावे या व्यक्तिगत पसंद को मानसिक बीमारी का प्रमाण तभी माना जा सकता है, जब उसके समर्थन में चिकित्सकीय या अन्य ठोस प्रमाण मौजूद हों।