केरल के फिल्म महोत्सव में 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग अटकी, थरूर ने मांगा हस्तक्षेप

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डेस्क : केरल में 25 से 30 सितंबर तक आयोजित होने वाले 18वें इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल (IDSFFK) में चयनित 31 फिल्मों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं मिलने पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से हस्तक्षेप करने की अपील की है।

थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव के लिए चुनी गई फिल्मों को अनुमति नहीं दिया जाना भारत की दुनिया भर के सिनेमा के लिए खुले मंच की परंपरा के विपरीत है। उन्होंने मंत्री से अधिकारियों के फैसले की समीक्षा कर इसे पलटने का आग्रह किया।

केरल स्टेट चलचित्र अकादमी की ओर से महोत्सव के लिए कुल 347 फिल्में भेजी गई थीं। मंत्रालय ने फिल्मों के सारांश और स्क्रीनर्स की समीक्षा के बाद 31 फिल्मों को सेंसर छूट देने से इनकार किया। इनमें प्रतियोगिता और क्यूरेटेड वर्ग की 18 फिल्में, इंटरनेशनल नॉन-फिक्शन श्रेणी की 9 फिल्में, फेस्टिवल विनर्स वर्ग की 3 फिल्में, नेपाल पैकेज की एक फिल्म और मलयालम फिल्म ‘ग्लोब’ शामिल हैं। ‘ग्लोब’ में अट्टाप्पडी के आदिवासी जीवन को चित्रित किया गया है।

जिन फिल्मों को अनुमति नहीं मिली है, उनमें राजनीतिक असहमति, जातिगत अधिकार, सामाजिक संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय युद्ध जैसे विषयों पर आधारित फिल्में शामिल हैं। ‘Sanitised Republic: Caste and Contracts’ में कोविड-19 के दौरान दिल्ली में संविदा पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों और जातिगत परिस्थितियों को दिखाया गया है। ‘Parliament Street’ ऐतिहासिक स्थल से जुड़ी सार्वजनिक स्मृतियों और इतिहास को सामने लाती है। वहीं ‘Put Your Soul on Your Hand and Walk’ गाजा के जीवन को फिल्मकार सेपिदेह फारसी और एक फिलिस्तीनी फोटो पत्रकार के बीच वीडियो कॉल के माध्यम से प्रस्तुत करती है।

‘Memories of a Window’ में ईरान में हुए प्रदर्शनों को नागरिकों द्वारा बनाए गए फुटेज के माध्यम से देखा गया है, जबकि ‘Birds of War’ व्यक्तिगत लेबनानी और सीरियाई अभिलेखों के जरिए क्रांति और निर्वासन की कहानी सामने लाती है। ‘Our Land’ और ‘Land of My Dreams’ भी उन फिल्मों में शामिल हैं जिन्हें स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं मिली है।

केरल के संस्कृति, सिनेमा एवं पर्यटन मंत्री पीसी विष्णुनाथ ने भी मंत्रालय के फैसले पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में समाज के विविध दृष्टिकोणों को सामने रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उनके अनुसार, कठोर चयन प्रक्रिया से गुजर चुकी फिल्मों को प्रदर्शित करने की अनुमति रोकना फिल्म महोत्सवों की क्यूरेटोरियल स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। दर्शकों को फिल्में देखने और उनके आधार पर अपने विचार बनाने तथा उन्हें व्यक्त करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

केरल स्टेट चलचित्र अकादमी ने मंत्रालय से इन फिल्मों की अनुमति पर नए सिरे से विचार करने का अनुरोध किया है। अकादमी का कहना है कि महोत्सव में शामिल प्रतिनिधियों, जूरी सदस्यों और फिल्मकारों ने यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली हैं तथा फिल्मों की स्क्रीनिंग से संबंधित शुल्क भी जमा कराया जा चुका है। ऐसे में अनुमति नहीं मिलने से महोत्सव के कार्यक्रम पर असर पड़ने की आशंका है।

महोत्सव का आयोजन 25 से 30 सितंबर तक तिरुवनंतपुरम के कैरली, श्री और निला थिएटरों में किया जाएगा।

नीना सबनानी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

इस बीच, 18वें IDSFFK में प्रख्यात एनिमेशन फिल्मकार नीना सबनानी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। पुरस्कार में दो लाख रुपये की नकद राशि, एक मूर्ति और प्रशस्ति-पत्र शामिल हैं। सम्मान समारोह 30 सितंबर को महोत्सव के समापन अवसर पर कैरली थिएटर में होगा।

महोत्सव के दौरान नीना सबनानी की 10 प्रमुख फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। उनकी फिल्मों में स्मृति, वस्तुओं और कहानियों को विशिष्ट दृश्य भाषा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पारंपरिक कलाकारों और लोक कथाकारों के साथ उनके सहयोग को भी व्यापक सराहना मिली है। उनकी फिल्म ‘हम चित्र बनाते हैं’ को 2016 में सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था।

नीना सबनानी एनिमेटर, इलस्ट्रेटर, शोधकर्ता और शिक्षिका के रूप में कला, कहानी, नृवंशविज्ञान और मौखिक परंपराओं को अपने काम में जोड़ती रही हैं।