डेस्क : कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही कांग्रेस के भीतर असंतोष एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया शामिल नहीं हुए। इसी बीच मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज वरिष्ठ विधायक यशवंतराय गौड़ा पाटिल ने विधानसभा से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।
लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर समेत कई नेता मौजूद रहे, लेकिन सिद्धारमैया की गैर-मौजूदगी ने कांग्रेस के भीतर बढ़ते मतभेदों की अटकलों को हवा दे दी।
गायत्री शांते गौड़ा का नाम हटने से नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया गायत्री शांते गौड़ा का नाम मंत्रिमंडल की अंतिम सूची से हटाए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। कुरुबा समुदाय की प्रमुख नेता गौड़ा को अंतिम समय में सूची से बाहर किया गया। माना जा रहा था कि वह मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली एकमात्र महिला होंगी।
गायत्री शांते गौड़ा को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की उम्मीद के बीच उनका नाम हटाए जाने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ गया। इस मुद्दे को सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह से दूर रहने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
वरिष्ठ विधायक का इस्तीफा, शिवकुमार पर बढ़ा दबाव
मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज विजयपुरा जिले की इंडी सीट से कई बार विधायक रहे यशवंतराय गौड़ा पाटिल ने विधानसभा से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। पाटिल ने आरोप लगाया कि वरिष्ठता, पार्टी के प्रति निष्ठा और चुनावी प्रदर्शन के बावजूद उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया।
पाटिल का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब कैबिनेट विस्तार के बाद कई कांग्रेस विधायक मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। इससे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर पार्टी के भीतर असंतोष को संभालने का दबाव बढ़ गया है।
बंद कमरे में बैठकों का दौर
कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर नाराज नेताओं के साथ बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। कई विधायक मंत्री पद नहीं मिलने को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सरकार को मजबूती देने की कोशिश के बीच कांग्रेस के सामने अब पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को शांत करने की चुनौती है।
कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद से ही अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन साधना पार्टी नेतृत्व के लिए अहम चुनौती रहा है। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य कांग्रेस में गुटबाजी और असंतोष की चर्चा को तेज कर दिया है।








