लद्दाख में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कारगिल परिषद भंग; 21 नवंबर को पंचायत चुनाव

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डेस्क : केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत कारगिल की लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी) को भंग कर दिया गया है। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने 21 नवंबर को पंचायत चुनाव कराने की घोषणा की है। इसके साथ ही लद्दाख के आठ जिलों में स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के गठन के लिए कुल 100 निर्वाचन क्षेत्रों को अधिसूचित किया गया है।

प्रशासनिक आदेश के अनुसार, कारगिल परिषद के भंग होने के बाद जिले के उपायुक्त को अंतरिम रूप से परिषद की शक्तियां और जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह व्यवस्था नई परिषद के गठन तक जारी रहेगी। इससे पहले 20 अक्टूबर को कारगिल परिषद के मुख्य कार्यकारी पार्षद डॉ. मोहम्मद जाफर अखून सहित कई पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

21 नवंबर को होगा पंचायत चुनाव

लद्दाख में पंचायत चुनाव के लिए घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, 26 अक्टूबर को चुनाव अधिसूचना जारी होगी। उम्मीदवार 2 नवंबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को होगी, जबकि उम्मीदवार 5 नवंबर तक अपने नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 21 नवंबर को कराया जाएगा और पूरी चुनाव प्रक्रिया 30 नवंबर तक संपन्न कराने का लक्ष्य रखा गया है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

आठ जिलों में 100 निर्वाचन क्षेत्र

लद्दाख में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत अब लेह और कारगिल के अलावा संकू, चांगथांग, नुब्रा, शाम, जांस्कर और द्रास को शामिल करते हुए आठ जिलों में स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के गठन की तैयारी है। नए निर्वाचन क्षेत्रों में लेह को 22, कारगिल को 21, संकू को 13, चांगथांग को 10, नुब्रा को 9, शाम को 9, जांस्कर को 9 और द्रास को 7 सीटें आवंटित की गई हैं।

इससे पहले लेह और कारगिल की दोनों परिषदों में कुल 52 पार्षद थे। नए ढांचे के तहत निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण पंचायत हलकों और नगर निकायों के वार्डों को आधार बनाकर किया गया है। इसमें मतदाताओं की संख्या के साथ भौगोलिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया है।

लद्दाख में नए प्रशासनिक ढांचे और पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को स्थानीय स्वशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई परिषदों के गठन से विभिन्न क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है।