“नास्तिक का नींद लेना और आस्तिकों का जागना अच्छा है” — मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’


जयपुर : मानसरोवर स्थित पटेल मार्ग के चिन्मय पथ पर रविवार को “नींद : समस्या और समाधान” विषयक एक विशेष आध्यात्मिक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जैन संत मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने महावीर वाणी के आलोक में नींद और जागरण के आध्यात्मिक एवं सामाजिक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने प्रेरक उद्बोधन में मुनि श्री ने कहा कि संसार में कुछ लोगों का जागृत और प्रमादमुक्त जीवन जीना अत्यंत आवश्यक है, किन्तु भगवान महावीर का एक गूढ़ संदेश यह भी है कि कुछ नास्तिक और दुष्कर्मों में लिप्त लोगों का सोना ही समाज के लिए हितकारी होता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, छल-कपट और घोटालों जैसी गतिविधियों में संलग्न हैं, उनके जागने से समाज में समस्याएँ बढ़ सकती हैं। ऐसे लोगों का विश्राम करना समाज के लिए अपेक्षाकृत कम हानिकारक है, जबकि सज्जनों और साधकों का जागृत रहना समाज के उत्थान का आधार बनता है।

मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ने नींद के वैज्ञानिक पक्ष का भी विश्लेषण करते हुए बताया कि नींद शरीर की एक स्वाभाविक और आवश्यक क्रिया है। आयु के अनुसार इसकी आवश्यकता भिन्न-भिन्न होती है। एक छोटे बालक को सामान्यतः 12 से 15 घंटे तक की नींद की आवश्यकता होती है, जबकि एक स्वस्थ वयस्क के लिए 6 से 7 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। उन्होंने कहा कि न केवल अनिद्रा एक समस्या है, बल्कि आवश्यकता से अधिक सोना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए व्यक्ति को यह विवेक अवश्य होना चाहिए कि कब और कितनी नींद लेना उचित है।

इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि साधक को नींद का दास नहीं बनना चाहिए। अधिक निद्रा स्वाध्याय, साधना और आत्मविकास के मार्ग में बाधक बन जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को भी समयबद्ध और नियंत्रित जीवनचर्या अपनाने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, कम नींद और अधिक नींद — दोनों ही स्थितियाँ जीवन में असंतुलन उत्पन्न करती हैं। अनिद्रा से स्वभाव में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और मानसिक थकान बढ़ती है, जबकि अत्यधिक और असमय की नींद व्यक्ति की प्रगति तथा सफलता में बाधा उत्पन्न करती है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ की स्तुति के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं को नींद संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु योग और ध्यान के व्यावहारिक प्रयोग भी कराए गए। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रातःकाल ध्यानयोग के विशेष सत्र आयोजित हुए, जिनमें बड़ी संख्या में साधक और श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

सायंकाल मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने पटेल मार्ग से विहार कर अग्रवाल फार्म हाउस की ओर प्रस्थान किया। इस दौरान मार्ग में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर सेवा और भक्ति का लाभ प्राप्त किया।

यह आयोजन केवल नींद की समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने जागरूक जीवन, आत्मानुशासन और आध्यात्मिक उन्नति के महत्व को भी रेखांकित किया। मुनिश्री के संदेश ने उपस्थित जनसमूह को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि वास्तविक जागरण केवल आँखों का नहीं, बल्कि चेतना का होना चाहिए।

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