‘निज पर शासन-फिर अनुशासन’ संयम का श्रेष्ठ संदेश : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर : अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में मंगलवार को ‘संयम’ विषय पर आध्यात्मिक सेमिनार का आयोजन किया गया। मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ के 44वें दीक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में संयम को व्यक्ति के आत्मिक उत्थान के साथ-साथ वर्तमान वैश्विक समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बताया गया। आचार्य श्री तुलसी का उद्घोष ‘निज पर शासन-फिर अनुशासन’ कार्यक्रम में संयम के श्रेष्ठ संदेश के रूप में प्रतिध्वनित हुआ।

श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि संयम समाधान है, जबकि संयम का अभाव समस्याओं को जन्म देता है। प्रकृति भी हमें निरंतर संयम और संतुलन का संदेश देती है। अपनी वृत्ति और प्रवृत्ति पर नियंत्रण रखना ही संयम है। असंयम से उच्छृंखलता बढ़ती है, जो शांति, समाधि और विकास के मार्ग में बाधक बनती है। उन्होंने अपने आत्मनियंत्रण को और अधिक पुष्ट करने की भावना भी व्यक्त की।

सेमिनार में बारह व्रतों के माध्यम से व्यक्तिगत जीवन में संयम को अपनाने के उपायों पर प्रकाश डाला गया। तत्त्वज्ञान के संदर्भ में कर्मवाद की व्याख्या की गई। वहीं ‘भरत मुक्ति’ गेय व्याख्यान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति का वास्तविक बड़प्पन उसके भीतर के श्रेष्ठ भावों से निर्मित होता है।

मुनिश्री संभव कुमार जी महाराज ने कहा कि संयम की प्राप्ति जीवन की दुर्लभ उपलब्धि है। यह जीवन का अनमोल रत्न है और जिसे यह प्राप्त हो जाए, वह परम सौभाग्यशाली है। उन्होंने बताया कि मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने आज से 44 वर्ष पूर्व आचार्य श्री तुलसी जी के कर-कमलों से जैन भागवती दीक्षा ग्रहण की थी। संयम पर्याय के इस दीर्घ कालखंड में उन्होंने बहुमुखी विकास किया है। उनकी आचार कुशलता, विवेकशीलता, मिलनसारिता और उदारता उल्लेखनीय है। उन्होंने मुनिश्री जी के सुस्वास्थ्य, चारित्रिक निर्मलता और निरंतर आत्मिक विकास की मंगलकामना की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रेक्षाध्यान एवं चौबीस तीर्थंकरों के जप अनुष्ठान का आयोजन हुआ। तीर्थंकर चन्द्रप्रभु की स्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात त्याग-प्रत्याख्यान एवं मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

तेरापंथ महिला मंडल (शहर) की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जैन ने बताया कि मंडल के बैनर तले आगामी 4 सितम्बर को सामूहिक आयंबिल तप तथा 7 सितम्बर को जैन विद्या विज्ञ परीक्षा के परीक्षार्थियों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।