निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्याय का अंत, जसपाल राणा का निधन


स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय खेल जगत को शुक्रवार को गहरा आघात लगा, जब देश के प्रसिद्ध निशानेबाज, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता तथा ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के प्रशिक्षक जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से निशानेबाजी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

राष्ट्रीय रायफल संघ के अधिकारियों के अनुसार, जसपाल राणा ने गुरुवार देर रात दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित विश्व कप प्रतियोगिता से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उन्होंने एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए अनेक पदक जीते तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया। वर्ष 1994 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई थी।

खिलाड़ी जीवन के बाद उन्होंने प्रशिक्षक के रूप में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर सहित अनेक युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर की ऐतिहासिक सफलता के पीछे भी जसपाल राणा के मार्गदर्शन को प्रमुख कारण माना जाता है।

अपने उत्कृष्ट खेल और प्रशिक्षण योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री तथा द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया था। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि उनके निधन से भारतीय निशानेबाजी ने एक ऐसे मार्गदर्शक को खो दिया है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं होगी।

जसपाल राणा का जीवन भारतीय खेल इतिहास में समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर हमेशा याद किया जाएगा।

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