पदभार संभालते ही विवादों में केरल के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर, जानिए क्या है पूरा मामला

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डेस्क : केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पदभार संभालने के पहले ही दिन लोकभवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने के कथित निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे लोगों की खान-पान की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया है। वहीं, राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश राज्यपाल की व्यक्तिगत खान-पान की पसंद के कारण दिया गया है और इससे कर्मचारियों के भोजन के विकल्प प्रभावित नहीं होंगे।

ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। इसके तुरंत बाद लोकभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन नहीं बनाने और नहीं परोसने के निर्देश की खबर सामने आने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।

कांग्रेस ने बताया व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केरल की खान-पान संस्कृति विविधतापूर्ण है। राज्य में बड़ी संख्या में लोग मांसाहारी भोजन करते हैं और तटीय क्षेत्र होने के कारण मछली यहां के खान-पान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल का यह कदम लोगों की पारंपरिक जीवनशैली और भोजन चुनने की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने वाला है। उन्होंने इसे संघ परिवार की विचारधारा से जोड़ते हुए निर्देश वापस लेने की मांग भी की।

माकपा ने भी उठाए सवाल

माकपा के प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि देश में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद का भोजन चुनने का अधिकार है। उनके अनुसार, राज्यपाल अपनी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार शाकाहारी भोजन कर सकते हैं, लेकिन इस पसंद को दूसरों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता और राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने भी खान-पान को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय बताते हुए इस कदम की आलोचना की।

राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने क्या कहा?

विवाद के बीच लोकभवन से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ओम प्रकाश माथुर पूरी तरह शाकाहारी हैं और इसी कारण उनके भोजन की व्यवस्था से संबंधित रसोई में बदलाव के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, लोकभवन में तैयार भोजन राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को परोसा जाता है। अन्य कर्मचारी अपने भोजन की व्यवस्था अलग से करते हैं।

सूत्रों ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के खान-पान की पसंद पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, रसोई में मांसाहारी भोजन तैयार करने को लेकर जारी निर्देश की सीमा और उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विवाद बना हुआ है।

व्यक्तिगत पसंद बनाम सार्वजनिक संस्थान की व्यवस्था

इस पूरे मामले ने व्यक्तिगत खान-पान की पसंद और सरकारी संस्थान की व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर राज्यपाल के शाकाहारी भोजन चुनने के अधिकार की बात है, तो दूसरी ओर विपक्ष का तर्क है कि किसी सार्वजनिक संस्थान की रसोई में भोजन की व्यवस्था तय करते समय वहां की विविध सांस्कृतिक परंपराओं और लोगों की पसंद का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

फिलहाल, लोकभवन की रसोई को लेकर दिया गया कथित निर्देश केरल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में राज्यपाल कार्यालय की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया जाता है या नहीं।