डेस्क : प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित एक मस्जिद को छह दिन के भीतर खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मस्जिद के मामले में उचित कदम उठाने की अपील की है।
मामला प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित रेस कोर्स मस्जिद से जुड़ा है। भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने मस्जिद परिसर को खाली करने के लिए छह दिन का समय दिया है। इस नोटिस के बाद मस्जिद के भविष्य और जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद तेज हो गया है।
वक्फ संपत्ति होने का दावा
ओवैसी ने सवाल उठाया है कि यदि मस्जिद को वर्ष 1977 से वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज बताया जा रहा है, तो उसके संरक्षण के लिए संबंधित अधिकारियों ने अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए। उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए और केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
वहीं, भूमि एवं विकास कार्यालय का पक्ष है कि मस्जिद जिस जमीन पर स्थित है, वह सरकारी भूमि है। ऐसे में विवाद का प्रमुख मुद्दा जमीन के स्वामित्व और उस पर मस्जिद के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
मस्जिद को खाली करने के नोटिस के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करने की बात कही है। संगठन ने मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान की सुरक्षा की मांग करते हुए कहा है कि कानूनी विवाद का समाधान होने तक किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।
संगठन के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर मामले में अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। इस बीच मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून ने आरोप लगाया है कि परिसर की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सहायता नहीं मिलने की बात भी कही है।
झुग्गी बस्ती के परिवारों का मामला भी चर्चा में
मस्जिद से जुड़े विवाद के साथ ही आसपास की झुग्गी बस्ती में रहने वाले परिवारों का मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने वहां रहने वाले करीब 700 परिवारों को हटाने और उन्हें सावदा घेवरा स्थित पुनर्वास कॉलोनी में बसाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।
फिलहाल मस्जिद को खाली करने के नोटिस, जमीन के स्वामित्व और संभावित कानूनी कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में है। अब इस विवाद में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के रुख पर नजर रहेगी।









