पश्चिम एशिया में उबाल: अमेरिकी नौसेना कार्रवाई और इज़राइल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष तेज


डेस्क :  अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसने एक वाणिज्यिक तेल टैंकर को निशाना बनाकर निष्क्रिय कर दिया, जो ईरान के खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहा था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में इज़राइल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष भी लगातार तेज होता जा रहा है।

सेंटकॉम के अनुसार, बोत्सवाना ध्वज वाला तेल टैंकर ‘एम/टी लेक्सी’ 24 घंटे तक लगातार चेतावनियों के बावजूद अपनी दिशा बदलने से इनकार करता रहा। आरोप है कि यह जहाज़ बिना माल के ईरान की ओर जा रहा था। अमेरिकी सेना के अनुसार, अंततः एक सैन्य विमान ने हेलफायर मिसाइल दागकर जहाज़ के इंजन रूम को निष्क्रिय कर दिया, जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया।

सेंटकॉम ने यह भी बताया कि 13 अप्रैल से शुरू हुए एक अभियान के तहत अब तक छह वाणिज्यिक जहाज़ों को निष्क्रिय किया गया है और 122 जहाज़ों को ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने से रोका या वापस मोड़ा गया है।

इसी बीच, भूमध्य सागर क्षेत्र में भी तनाव की एक अलग घटना सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी एमएससी ने पुष्टि की है कि उसके जहाज़ ‘सरिस्का वी’ पर इराक के उम्म क़स्र बंदरगाह के पास दो प्रक्षेपास्त्रों से हमला हुआ। ब्रिटेन की मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने पहले इस क्षेत्र में हमले की सूचना दी थी।

बाद में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि यह जहाज़ अमेरिकी स्वामित्व वाला था और यह कार्रवाई ईरानी जहाज़ पर ओमान के पास हुए हमले के जवाब में की गई है। हालांकि एमएससी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह एक तटस्थ वाणिज्यिक कंपनी है, जिसका अमेरिका या इज़राइल से कोई संबंध नहीं है। कंपनी के अनुसार, उसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड में है और स्वामित्व इतालवी नागरिकों के पास है।

इधर, इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच जमीनी संघर्ष भी जारी है। हालांकि वॉशिंगटन में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का पहला दिन पूरा हुआ है और बातचीत बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग में फिर से शुरू होगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीनेट की विदेश संबंध समिति में सुनवाई के दौरान उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच समाधान संभव है, लेकिन उन्होंने संघर्ष के लिए हिज़्बुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इज़राइल और लेबनान के बीच शांति समझौता “कल ही संभव है”, बशर्ते बाधा हिज़्बुल्लाह हटे।

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया था कि उन्होंने हिंसा रोकने के लिए एक समझौता कराया है। हालांकि लेबनान के दूतावास ने स्पष्ट किया कि यह प्रारंभिक ढांचा होगा, जिसमें पहले इज़राइल द्वारा बेरूत पर हमलों और हिज़्बुल्लाह द्वारा इज़राइल पर हमलों को रोका जाएगा, उसके बाद इसका विस्तार किया जाएगा।

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इन वार्ताओं को देश के लिए “सबसे कम महंगा विकल्प” बताया है, हालांकि हिज़्बुल्लाह की ओर से इसका विरोध जारी है।

इस पूरे संघर्ष की मानवीय कीमत भी लगातार बढ़ रही है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इज़राइली हमलों में 3,468 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें मंगलवार को हुई 35 मौतें भी शामिल हैं। वहीं इसी अवधि में 26 इज़राइली सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार की भी जान गई है।

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