डेस्क : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने सोमवार को वर्ष 2018 के इस मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। फैसले के समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी की ओर से तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के संबंध में की गई कथित विवादित टिप्पणी से जुड़ा है। उस समय अमित शाह वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री नहीं, बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।
स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
मामले में राहुल गांधी को अदालत में पेश होने के लिए नवंबर 2023 में तलब किया गया था। इसके बाद 20 फरवरी 2024 को वह अदालत में पेश हुए, जहां उन्हें जमानत मिल गई। मामले की सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने फैसले के लिए 26 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की थी।
अदालत के फैसले से राहुल गांधी को राहत
सोमवार को अदालत ने मामले में राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना। इस फैसले से अमित शाह पर कथित टिप्पणी को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी कार्यवाही में राहुल गांधी को राहत मिली है।
राहुल गांधी रायबरेली से सांसद होने के साथ-साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। फैसले के दिन उनके सुल्तानपुर पहुंचने को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में भी हलचल रही।
राजनीतिक गलियारों में फैसले की चर्चा
राहुल गांधी को बरी किए जाने का फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस मामले में अदालत के निर्णय को संबंधित शिकायत और सुनवाई के तथ्यों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। यह फैसला अमित शाह से संबंधित टिप्पणी के मामले में आया है, न कि राहुल गांधी के खिलाफ किसी अन्य मामले में।









