राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा- वैश्विक विभाजन के दौर में ‘दीवारें नहीं, पुल बनाने’ की जरूरत

0

डेस्क : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि जब दुनिया संघर्ष और आर्थिक विभाजन के कारण बंटी हुई है, ऐसे समय में भारत की प्राचीन सभ्यतागत विचारधारा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ दुनिया को दीवारें खड़ी करने के बजाय पुल बनाने का संदेश देती है। राष्ट्रपति ने मंगलवार को स्कोप्जे में उत्तरी मैसेडोनिया की संसद को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उत्तरी मैसेडोनिया की राष्ट्रपति गोर्दाना सिल्यानोव्स्का-दावकोवा भी मौजूद थीं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत उत्तरी मैसेडोनिया को कोई दूरस्थ देश नहीं, बल्कि स्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध दो हजार साल से भी अधिक पुराने ऐतिहासिक संपर्कों से जुड़े हैं। इस क्षेत्र के योद्धाओं और व्यापारियों की ऐतिहासिक यात्राओं ने व्यापार, दर्शन और कला के महत्वपूर्ण मार्गों को खोलते हुए प्राचीन सभ्यताओं को जोड़ा था।

उन्होंने कहा कि भारत और उत्तरी मैसेडोनिया को लोकतंत्र एक साझा विश्वास के रूप में जोड़ता है। लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों की स्वतंत्रता और अधिकारों का आधार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की संसदें जनता की स्वतंत्रता की संरक्षक, कानूनों की निर्माता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतिबिंब हैं। ऐसे में संसदीय कूटनीति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

राष्ट्रपति ने युवा सांसदों से नई दिल्ली और स्कोप्जे के बीच यात्राओं को बढ़ावा देने तथा संसदीय कार्यप्रणाली और सार्वजनिक नीति निर्माण के क्षेत्र में एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का आह्वान किया।

मुर्मू ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के भू-राजनीतिक और आर्थिक शक्ति केंद्र तेजी से बदल रहे हैं। भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को हाशिये का क्षेत्र नहीं, बल्कि विकास और नवाचार के एक गतिशील केंद्र के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि उत्तरी मैसेडोनिया इस बदलाव के महत्वपूर्ण मोड़ पर स्थित है और भूमध्यसागर को मध्य यूरोप तथा पूर्व को पश्चिम से जोड़ने वाला अहम प्रवेश द्वार है।

उन्होंने कहा कि भारत द्विपक्षीय स्तर के साथ-साथ व्यापक क्षेत्र में भी उत्तरी मैसेडोनिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसरों को तलाशने पर भी जोर दिया जा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कोई भी देश अकेले समृद्ध नहीं हो सकता। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वैश्विक परिदृश्य संघर्ष और आर्थिक विभाजन से प्रभावित हो, तब यह दर्शन देशों को एक-दूसरे के बीच दीवारें खड़ी करने के बजाय सहयोग और साझेदारी के पुल बनाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि भारत और उत्तरी मैसेडोनिया जैसे दो लोकतांत्रिक देशों को इतिहास से जुड़े अपने संबंधों और भविष्य की साझा दृष्टि के आधार पर ऐसा मार्ग तैयार करना चाहिए, जो दोनों देशों के लोगों के लिए शांति और समृद्धि सुनिश्चित करे।

इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया तथा सांसद दिनेश शर्मा और विजय बघेल भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार रात अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा के दूसरे चरण में स्कोप्जे पहुंची थीं।