रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत नई ऊंचाइयों की ओर : प्रधानमंत्री मोदी

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डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है। उन्होंने हाल में डीआरडीओ द्वारा किए गए सफल मिसाइल परीक्षणों और स्वदेशी युद्धपोत के नौसेना में शामिल किए जाने को देश की बढ़ती रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया।

‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने अपनी हालिया इंडोनेशिया यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की आपूर्ति करेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया का भरोसा भारतीय रक्षा उपकरणों और तकनीक में लगातार बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी महीने डीआरडीओ ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया। इसके अलावा कुछ दिन पहले कुशा मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के सामूहिक प्रयास हैं।

उन्होंने भारतीय नौसेना में शामिल किए गए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि का भी उल्लेख किया। 11 जुलाई को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में इसे नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल किया गया था। करीब 6,670 टन विस्थापन क्षमता वाले इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और यह 28 नॉट तक की गति से चल सकता है। यह सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता से लैस है।

डीआरडीओ ने 8 जुलाई को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण 60 किलोमीटर की न्यूनतम निर्धारित दूरी के लिए किया गया और रॉकेट ने तय प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करते हुए लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा।

वहीं, 23 जुलाई को डीआरडीओ ने ओडिशा के तट से दूर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘कुशा’ लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया। परीक्षण के दौरान तेज गति और अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरे का अनुकरण करने वाले इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य को मिसाइल प्रणाली ने सफलतापूर्वक भेद दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात और मित्र देशों के साथ राजनीतिक सहयोग—हर क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इन उपलब्धियों को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बढ़ती ताकत का प्रतीक बताया।