भारत-चीन संबंधों में जमी बर्फ पिघलने के संकेत, बीजिंग में हुई हाई प्रोफाइल बैठक

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डेस्क : भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद अब द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी कड़ी में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को बीजिंग में चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

बीजिंग की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे मिस्री ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उपमंत्री सुन हाइयान से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने शीर्ष नेतृत्व की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने और भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।

भारतीय दूतावास की ओर से सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, विक्रम मिस्री और हुआ चुनयिंग ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की उस सोच को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, जिसके तहत भारत और चीन एक-दूसरे के साझेदार हैं और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर उपलब्ध कराते हैं।

बैठक में व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को भी स्वीकार किया।

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में काफी तनाव आ गया था। सीमा पर तनाव का असर दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ा। हालांकि, पिछले कुछ समय से उच्चस्तरीय बातचीत के जरिए संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मिस्री और सुन हाइयान के बीच हुई बातचीत में राजनीतिक स्तर के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क, शैक्षणिक सहयोग और थिंक टैंक के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच संवाद के इन माध्यमों को मजबूत करने को रिश्तों में विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विदेश सचिव की बीजिंग यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने के साथ-साथ व्यापार, आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ाई है। हालांकि, सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे अब भी दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना इस प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है। ऐसे में विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा और चीनी नेतृत्व के साथ उनकी बैठकों को दोनों देशों के बीच संवाद और संबंध सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।