श्रद्धा और सौहार्द का संगम: मानसरोवर में संतों का आगमन


जयपुर : मानसरोवर क्षेत्र में गुरुवार को आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला, जब आचार्य श्री महाश्रमण जी महाराज के विनीत सुशिष्य संत श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” एवं संत श्री संभव कुमार जी महाराज का पावन पदार्पण हुआ। यह पूरा क्षेत्र श्रद्धा, सेवा और धार्मिक भावनाओं से एक नई ऊर्जा से आलोकित हो उठा।

मानसरोवर, जो जयपुर का एक प्रमुख उपनगर है, लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से सक्रिय प्रवासी क्षेत्र माना जाता है। विशेष रूप से यहाँ सवाई माधोपुर क्षेत्र से आए श्रावक-श्राविकाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही है, जिन्होंने अपनी परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को यहाँ भी जीवंत बनाए रखा है।

गुरुवार को मुनिद्वय महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल, निर्माण नगर से विहार करते हुए जुलूस के रूप में मानसरोवर पहुँचे। मार्ग में अनेक श्रद्धालु उनसे जुड़ते गए और वातावरण पूर्णतः भक्ति एवं मंगलभाव से भर गया।

स्थानीय जैन समाज के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर संतों का भावपूर्ण स्वागत किया। पुष्पवर्षा, अभिवादन और श्रद्धा से ओत-प्रोत वातावरण में संतों के आगमन को एक पावन अवसर के रूप में स्वीकार किया गया।

संत श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” एवं संत श्री संभव कुमार जी महाराज ने इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को सौहार्द, प्रेम, भाईचारा और मैत्री भाव को बढ़ाने का संदेश प्रदान किया। उन्होंने समाज में समन्वय और एकता की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा दी तथा जैन एकता को मजबूत करने पर विशेष बल दिया।

संतों का वर्तमान प्रवास श्रीमान विनोद कुमार जी एवं श्रीमती कीर्ति जी जैन के निवास स्थान 61/245, रजत पथ, मानसरोवर में है। प्रवास अवधि के दौरान दैनिक प्रवचन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम इसी स्थान पर आयोजित किए जाएंगे, जहाँ श्रद्धालुओं को सत्संग एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

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