मुंबई : लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अनशन को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे देश की अब तक की सबसे “असंवेदनशील सरकार” करार दिया।
पत्रकारों से बातचीत में आदित्य ठाकरे ने कहा कि सोनम वांगचुक अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं और सरकार उनकी आवाज को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।
ठाकरे ने कहा, “सोनम वांगचुक जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों पर जिम्मेदारी तय हो। लेकिन सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। मुझे नहीं लगता कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी इतनी असंवेदनशीलता देखने को मिली होगी।”
उन्होंने दावा किया कि देश का युवा सोनम वांगचुक के साथ खड़ा है और विपक्षी दल लगातार उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जता रहे हैं। ठाकरे ने कहा कि भाजपा और युवाओं के बीच दूरी बढ़ती जा रही है।
विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर जताया समर्थन
सोनम वांगचुक के समर्थन में विपक्षी नेताओं का जंतर-मंतर पहुंचने का सिलसिला जारी है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले और सपा सांसद डिंपल यादव समेत कई नेताओं ने उनसे मुलाकात कर स्वास्थ्य की जानकारी ली।
सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को वांगचुक से मुलाकात कर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी छात्रों से जुड़े मुद्दों को संसद के आगामी मानसून सत्र में उठाया जाएगा।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनसे स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन खत्म करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता की आवाज सुने।
खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि जब नागरिक अपनी बात रखने के लिए अनशन करते हैं तो सरकार का धर्म है कि वह संवाद करे, न कि नजरअंदाज करे।
AIMIM ने भी सरकार से बातचीत की अपील की
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने भी सोनम वांगचुक के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और बातचीत शुरू करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वांगचुक छात्रों के भविष्य और न्याय की मांग को लेकर लंबे समय से अनशन कर रहे हैं, ऐसे में सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
20वें दिन भी जारी है अनशन, स्वास्थ्य पर दिल्ली हाईकोर्ट की नजर
सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर लगातार 20वें दिन भूख हड़ताल पर हैं। वह देश में परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए प्रशासन को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक का जीवन महत्वपूर्ण है और सरकार को स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने चाहिए।
वांगचुक के स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार, 17 जुलाई सुबह उनका वजन 56.55 किलोग्राम दर्ज किया गया, जिसमें पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम की कमी आई। उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और पल्स रेट 72 प्रति मिनट दर्ज किया गया।
राजनीतिक रूप से सोनम वांगचुक का अनशन अब विपक्ष के लिए केंद्र सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जबकि सरकार की ओर से इस मामले पर अब तक कोई बड़ा राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है।








