वॉशिंगटन: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को फिलहाल ऐसे प्रवासियों को उनके मूल देश के बजाय अन्य देशों में निर्वासित करने की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत अब इस नीति की कानूनी वैधता पर सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या ऐसे प्रवासियों को किसी तीसरे देश में भेजे जाने से पहले इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराने और अपनी बात रखने का सार्थक अवसर दिया जाना जरूरी है। अदालत के मंगलवार के आदेश से फिलहाल निचली अपीली अदालत के उस फैसले पर रोक लग गई है, जिसने प्रशासन की इस निर्वासन नीति को सीमित किया था।
संघीय सरकार के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि निचली अदालत के फैसले के कारण करीब 70 लोगों को लेकर जाने वाली एक निर्वासन उड़ान रद्द करनी पड़ी थी। इन लोगों को तीन अलग-अलग देशों में भेजा जाना था।
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी पिछले वर्ष इस मामले की सुनवाई के दौरान ट्रंप प्रशासन को तीसरे देशों में निर्वासन की उड़ानों को अस्थायी रूप से जारी रखने की अनुमति दे चुका है। यह नीति ट्रंप प्रशासन के व्यापक आव्रजन नियंत्रण अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने गोपनीय या सीमित रूप से सार्वजनिक समझौतों के तहत करीब 25,000 लोगों को दो दर्जन से अधिक देशों में निर्वासित किया है। इनमें लाइबेरिया और गुयाना जैसे देश भी शामिल हैं। हालांकि, इस नीति के तहत भेजे गए अधिकांश लोगों को मैक्सिको भेजा गया है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ निर्वासन का अंतिम आदेश है, लेकिन उन्हें उनके मूल देश वापस भेजना संभव नहीं है या उनके देश उन्हें स्वीकार करने से इनकार करते हैं, उन्हें तीसरे देशों में भेजा जाता है। संघीय अधिकारियों के अनुसार, इनमें आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए कुछ लोग भी शामिल हैं। प्रशासन का यह भी कहना है कि संबंधित देशों की सरकारों ने आश्वासन दिया है कि निर्वासित लोगों को उत्पीड़न या यातना का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हालांकि, प्रवासियों के वकीलों ने इस नीति पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि कुछ प्रवासियों को ऐसे देशों में भेज दिया गया, जिनसे उनका पहले कोई संबंध नहीं था और जिनके बारे में उन्होंने अपने वहां पहुंचने से पहले कभी सुना तक नहीं था। कुछ लोगों को वहां हिरासत में रखे जाने के मामले भी सामने आए हैं।
प्रवासियों के वकीलों के मुताबिक, कई लोगों को सुरक्षा संबंधी गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्हें अपने मूल देशों में उत्पीड़न या यातना का खतरा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लाखों लोगों को निर्वासित करने के अपने अभियान को आगे बढ़ा रहा है। अब शीर्ष अदालत की आगामी सुनवाई में यह तय होगा कि तीसरे देशों में निर्वासन की यह नीति प्रवासियों को प्राप्त कानूनी सुरक्षा के अनुरूप है या नहीं।








