तीन मौतों पर सियासी संग्राम, राहुल बनाम मोदी बयानबाज़ी तेज


डेस्क : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। मामला ओमान के पास समुद्री क्षेत्र में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले से जुड़ा है, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए भारतीय नाविकों को लेकर प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने लिखा कि जब भारतीय नागरिकों की विदेश में हत्या होती है, तब प्रधानमंत्री को सख्त रुख अपनाना चाहिए, लेकिन इस मामले में उनकी चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि आगामी जी-7 बैठक में प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात करेंगे, लेकिन मृत नाविकों के लिए अब तक कोई शब्द नहीं बोले गए।

यह घटना उस समय की है जब ओमान के पास अरब सागर क्षेत्र में एक वाणिज्यिक जहाज एमटी सेटेबेलो पर हमला हुआ। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि यह जहाज ईरान के बंदरगाहों पर लागू समुद्री प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल मौजूद थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन की मृत्यु की पुष्टि हुई।

इस मामले पर विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख जेसन मीक्स को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यह दूसरा अवसर है जब क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रतिनिधि को तलब किया गया है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, हमले में शामिल जहाज विदेशी ध्वज वाले थे। इनमें दो जहाज पलाऊ के ध्वज के तहत और एक गिनी के ध्वज के तहत पंजीकृत था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रभावित जहाज भारतीय स्वामित्व वाले नहीं थे, हालांकि उन पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत थे।

मंत्रालय ने बताया कि तीनों मृतकों की पहचान कर ली गई है और उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, क्षेत्र में चल रहे खोज एवं बचाव अभियान पर भारतीय दूतावास ओमान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में 18 हजार से अधिक भारतीय नाविक विभिन्न जहाजों पर कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या में कर्मी ओमान और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में तैनात हैं, जो वैश्विक व्यापार मार्गों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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