जयपुर : अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में शनिवार को मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल शहर की ओर से तप अनुमोदना समारोह आयोजित किया गया। समारोह में श्री मनोज-मधु श्यामसुखा की पुत्रवधू श्रीमती दिव्या-साहिल श्यामसुखा के अट्ठाई तप की पूर्णता पर उनकी तपस्या की अनुमोदना की गई।
इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल शहर की बहनों तथा तपस्विनी के परिवार की बहनों ने अलग-अलग तप अनुमोदना गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में तेरापंथ समाज की ओर से सभा अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी गोलछा, तेरापंथ महिला मंडल शहर की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जी जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
तपस्विनी बहन का साहित्य भेंट कर एवं दुपट्टा धारण करवाकर सम्मान किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनकी तपस्या के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं।
इस अवसर पर मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा, “तपस्या से तस्वीर और तकदीर दोनों बदलती हैं।” उन्होंने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आंतरिक जागरण की साधना है। उन्होंने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से तपस्विनी की साधना से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में तप और संयम को अपनाने का आह्वान किया।
श्रीमती मंजुला गुजरानी ने ग्रहण किया चौविहार संथारा
इसी क्रम में सरदारशहर निवासी एवं जयपुर प्रवासी स्वर्गीय बजरंगलाल जी गुजरानी की धर्मपत्नी तथा श्री मनोज जी गुजरानी की माताश्री श्रीमती मंजुला जी गुजरानी ने शनिवार, 8 अगस्त को प्रातः 8:32 बजे मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ से चौविहार संथारे का प्रत्याख्यान ग्रहण किया।
जैन परंपरा में संथारा आत्मसंयम, वैराग्य और आध्यात्मिक साधना की अत्यंत गंभीर अवस्था मानी जाती है। इस अवसर पर साधिका श्रीमती मंजुला जी गुजरानी के प्रति साधुवाद व्यक्त किया गया तथा उनके परिवार के धैर्य, साहस और धार्मिक भावना की भी सराहना की गई।
समारोह का वातावरण श्रद्धा, तप, संयम और आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत रहा।








