ट्रंप का नया व्यापारिक दांव: भारत सहित 60 देशों पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव

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डेस्क : अमेरिका ने वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा कदम उठाते हुए भारत सहित कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव “जबरन श्रम (Forced Labour)” और आपूर्ति श्रृंखला में श्रम मानकों के उल्लंघन के आरोपों को आधार बनाकर तैयार किया गया है।

प्रस्ताव के तहत भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों से आने वाले उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है, जबकि कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ताइवान जैसे देशों पर 10 प्रतिशत न्यूनतम शुल्क प्रस्तावित है।

यह कार्रवाई अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) की ओर से की गई है, जिसने इस मुद्दे पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। अमेरिका का कहना है कि कई देश अपने यहां बनने वाले उत्पादों में जबरन श्रम पर रोक लगाने और उसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार में असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा हो रही है।

यूएसटीआर का तर्क

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने कहा है कि जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों की आपूर्ति वैश्विक बाजार में अमेरिकी श्रमिकों और कंपनियों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करती है। इसी कारण इस तरह के व्यापार पर नियंत्रण जरूरी है।

अमेरिकी पक्ष का यह भी कहना है कि कुछ देशों ने इस दिशा में शुरुआती कदम उठाए हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर अभी भी एक समान और सख्त व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।

भारत पर संभावित प्रभाव

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत के निर्यात क्षेत्र पर इसका असर पड़ सकता है। विशेषकर निम्न क्षेत्रों में लागत और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका है—

  • इंजीनियरिंग उत्पाद
  • वस्त्र एवं परिधान उद्योग
  • रसायन उद्योग
  • औषधि (फार्मा) क्षेत्र
  • अन्य विनिर्माण आधारित निर्यात

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है, जिससे निर्यात पर दबाव पड़ सकता है।

हालांकि यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है और इसे लागू करने से पहले सार्वजनिक परामर्श और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

कानूनी प्रक्रिया और अगला चरण

अमेरिकी प्रशासन ने इस प्रस्ताव पर 6 जुलाई तक लिखित सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद 7 जुलाई से इस मामले पर सार्वजनिक सुनवाई शुरू होगी, जिसमें विभिन्न देशों, उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों की राय ली जाएगी।

इन सुनवाइयों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि किन देशों पर कितना शुल्क लागू किया जाएगा और किन उत्पादों को छूट दी जाएगी।

कानूनी पृष्ठभूमि

यह पूरी प्रक्रिया अमेरिकी व्यापार कानून के तहत सेक्शन 301 जांच के अंतर्गत की जा रही है, जो अमेरिकी सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी देश की व्यापार नीतियों को “अनुचित या भेदभावपूर्ण” मानते हुए उन पर जवाबी शुल्क लगा सके।

इससे पहले अमेरिका ने आपातकालीन शक्तियों के तहत कुछ टैरिफ लगाए थे, जिन्हें अदालत द्वारा रद्द किए जाने के बाद अब प्रशासन ने सेक्शन 301 जैसे कानूनी रूप से मजबूत रास्ते को अपनाया है।

वैश्विक व्यापार में बढ़ सकती है तनातनी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है। कई देश पहले ही इस जांच और प्रस्तावित टैरिफ पर आपत्ति जता सकते हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट है कि यह कदम अंतिम निर्णय नहीं है, बल्कि एक लंबी कानूनी और परामर्श प्रक्रिया की शुरुआत है, जिसका परिणाम आने वाले महीनों में तय होगा।

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