ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी चुनाव से पहले ईरान की बढ़ सकती हैं सैन्य गतिविधियां

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डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशंका जताई है कि तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान, अमेरिका के खिलाफ अपनी गतिविधियां बढ़ा सकता है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान को लगता है कि ऐसा करने से अमेरिकी सरकार और रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अमेरिका चाहे तो ईरान के साथ जारी युद्ध को जल्द समाप्त कर सकता है।

टेनेसी में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान चुनाव से पहले कुछ अतिरिक्त कदम उठा सकता है, क्योंकि उसे लगता है कि इससे अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस संघर्ष को बहुत कम समय में समाप्त करने की क्षमता रखता है।

ट्रंप ने ईरान की नौसैनिक ताकत को हुए नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि उनका प्रशासन अब तक ईरान के प्रति काफी संयम बरतता आया है। उन्होंने दावा किया कि फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान के 159 जहाज डुबोए जा चुके हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलने की चर्चा

ट्रंप ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलने की संभावना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस जलमार्ग का नाम ‘ट्रंप स्ट्रेट’ रखने के बारे में सोच रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और युद्ध के दौरान यह क्षेत्र तनाव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

ईरान के साथ जारी संघर्ष अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। ट्रंप इन चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। इन चुनावों के परिणाम से अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

फरवरी से जारी संघर्ष का वैश्विक असर

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया। संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही और तेल परिवहन बुरी तरह प्रभावित होने की खबरें सामने आईं।

युद्ध का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा। जून में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष रोकने तथा आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करने के उद्देश्य से एक रूपरेखा समझौता हुआ था। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन से जुड़े मतभेदों के कारण समझौते को लागू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

ट्रंप ने पहले भी संकेत दिया था कि तीन नवंबर के चुनाव के बाद ईरान के साथ सैन्य संघर्ष समाप्त हो सकता है। फिलहाल, युद्धविराम और क्षेत्र में समुद्री आवाजाही बहाल करने को लेकर स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।