विनय से विकास तक: मानसरोवर में मुनि श्री तत्त्व रुचि एवं मुनि संभव कुमार जी का प्रवचन


जयपुर : आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” एवं मुनि श्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में मानसरोवर क्षेत्र में चल रही धर्म यात्रा के अंतर्गत आध्यात्मिक गतिविधियाँ आज भी श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुईं।

मुनि द्वय ने मानसरोवर के रजत पथ, किरण पथ एवं स्वर्ण पथ सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर श्रावक-श्राविकाओं से भेंट की और उन्हें धार्मिक मार्ग पर अग्रसर रहने का संदेश दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सेवा एवं दर्शन का लाभ प्राप्त किया।

इसके पश्चात पटेल मार्ग स्थित चिन्मय पथ पर श्रीमान मुकेश कुमार जैन (सीए) के निवास पर आयोजित धर्म सभा में मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने विनय को जीवन का श्रेष्ठ आभूषण बताते हुए कहा कि व्यक्ति चाहे जितनी भी सफलता प्राप्त कर ले, यदि उसमें विनम्रता का अभाव है तो उसका ज्ञान और उपलब्धि पूर्ण नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि विनम्रता से प्राप्त ज्ञान ही जीवन में स्थायित्व और शोभा प्रदान करता है।

मुनि श्री संभव कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि विनम्रता सुई की भाँति जोड़ने का कार्य करती है, जबकि अहंकार कैंची की तरह संबंधों को काट देता है। उन्होंने कहा कि महानता का वास्तविक मार्ग विनम्रता से होकर ही गुजरता है। अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है, जबकि विनम्रता उसे ऊँचाई प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि जो जितना बड़ा होता है, उसके भीतर उतनी ही अधिक विनम्रता होनी चाहिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर पद्म प्रभु की स्तुति के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रेक्षाध्यान के प्रयोग कराए गए तथा धर्माचार्य की महिमा पर आधारित भक्ति गीत का संगान हुआ। कार्यक्रम का समापन प्रार्थना एवं महामांगलिक के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।

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