डेस्क : बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीआई डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। मायावती ने महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जनकल्याण को प्राथमिकता देने की मांग की।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि यूपीआई डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब इस पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था लोगों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इसे सरकार की मुनाफाखोरी वाली नीति करार देते हुए कहा कि व्यवस्था को चाहे किसी भी नाम से जाना जाए, इसका असर अंततः आम जनता के खर्च पर पड़ सकता है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि देश की बड़ी आबादी पहले से ही गरीबी और महंगाई की समस्या से जूझ रही है। उन्होंने बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां लाभ कमाने वाली व्यावसायिक योजनाओं के बजाय कल्याणकारी दृष्टिकोण पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार जनता की आर्थिक परेशानियों की चिंता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा।
स्मार्ट स्कूल योजना पर भी उठाए सवाल
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की करीब 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की प्रस्तावित योजना का स्वागत किया, लेकिन इसके साथ ही बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्मार्ट पढ़ाई से पहले स्कूलों में बच्चों के लिए पर्याप्त भवन, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने योजना के लिए प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये के अनुमानित खर्च पर भी सवाल उठाया और सरकार से इस पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।
गौरतलब है कि यूपीआई से जुड़े नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क का प्रावधान बताया गया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।








