परिजनों के मुताबिक, डॉक्टर पर करीब 1.40 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। आरोप है कि लोन माफ कराने का झांसा देकर गरिमा सिंह नाम की महिला ने अलग-अलग बैंकों से उनके नाम पर लोन करवाए और रकम अपने कब्जे में ले ली। बाद में जब लोन की किस्तें जमा नहीं हुईं तो बैंकों की ओर से डॉक्टर पर लगातार दबाव बनाया जाने लगा।
सैलरी से कई गुना अधिक थी EMI
परिवार का आरोप है कि डॉक्टर की मासिक आय की तुलना में लोन की EMI कई गुना अधिक हो गई थी। लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव और कथित जालसाजी से वह परेशान थे। पुलिस अब सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ लोन, बैंक खातों और संबंधित लोगों के बीच हुए आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है।
आरोपी के खिलाफ कई शिकायतें
पुलिस के अनुसार, गरिमा सिंह और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ गोरखपुर में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। एम्स और सहजनवां थाने में चार मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा छह नए प्रार्थना पत्र भी पुलिस को मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। कुशीनगर समेत कुछ अन्य जिलों में भी शिकायतें मिलने की बात सामने आई है।
बैंक दस्तावेज और लेनदेन खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। जांच में बैंक खातों, लोन से जुड़े दस्तावेज, पैसों के लेनदेन और डॉक्टर के आरोपी महिला से संपर्क समेत अन्य पहलुओं को शामिल किया गया है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित लोन जालसाजी का नेटवर्क कितना बड़ा था।








