नोएडा : नोएडा प्राधिकरण में कथित 100 करोड़ रुपये से अधिक के भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) ने छह एफआईआर दर्ज कराई हैं। इन मामलों में एक समाजवादी पार्टी नेता, तीन प्राधिकरण अधिकारियों और अन्य आरोपियों को नामजद किया गया है।
एसआईटी की ओर से नोएडा के फेज-1 थाने में दर्ज कराए गए मुकदमों में मुआवजा राशि के कथित गबन, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में किसानों को निर्धारित राशि से कहीं अधिक मुआवजा दिलाने के बदले अधिकारियों द्वारा नकद कमीशन लेने का आरोप है।
जांच एजेंसी ने प्राधिकरण के पूर्व अधिकारियों राजेश कुमार, दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार नागर सहित सपा नेता विजेंद्र कुमार त्यागी तथा अन्य लोगों को नामजद किया है। तीन मामलों में मुआवजा राशि हड़पने के आरोप हैं, जबकि अन्य मामलों में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
यह मामला नोएडा के विभिन्न गांवों में भूमि अधिग्रहण के दौरान दिए गए अतिरिक्त मुआवजे से जुड़ा है। एसआईटी की जांच में सामने आया कि कुछ लाभार्थियों को अदालत के आदेशों और निर्धारित नियमों से अधिक भुगतान किया गया। जांच रिपोर्ट में अधिकारियों और लाभार्थियों के बीच कथित मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।
गौरतलब है कि इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी कर रही है। न्यायालय ने पूर्व में कथित अनियमितताओं, अतिरिक्त भुगतान और प्राधिकरण के कामकाज में पारदर्शिता की कमी को लेकर विस्तृत जांच के आदेश दिए थे।
बताया जाता है कि वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव से जुड़े एक मामले के सामने आने के बाद इस कथित घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच आगे बढ़ने पर कई अन्य गांवों में भी अतिरिक्त मुआवजा भुगतान के मामले सामने आए।
एसआईटी अब दर्ज मुकदमों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है और मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


