नई दिल्ली : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश की रक्षा क्षमताओं को एक बड़ी रणनीतिक मजबूती प्रदान करते हुए हाल ही में तीन महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। 10 और 11 जून को 24 घंटे के भीतर किए गए इन परीक्षणों में बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (बीएमडी) प्रणाली और नेवल एंटी-शिप मिसाइल तकनीक का सफल प्रदर्शन शामिल है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, डीआरडीओ ने इस दौरान ऐसे इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया है जो 2,000 से 5,000 किलोमीटर रेंज वाली इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (आईआरबीएम) को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम हैं। ये इंटरसेप्टर वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखते हैं। परीक्षणों में लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर निष्क्रिय किया गया, जिससे देश की बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली की क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन हुआ।
इन सफल परीक्षणों के साथ ही डीआरडीओ ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल–मीडियम रेंज (एनएएसएम-एमआर) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया। इस परीक्षण में मिसाइल ने निर्धारित दूरी पर लक्ष्य को सटीकता से भेदकर भारतीय नौसेना की समुद्री हमले की क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की।
सूत्रों के अनुसार, इन परीक्षणों का उद्देश्य उन्नत और बहु-स्तरीय मिसाइल खतरों से निपटने के लिए भारत की रक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब पड़ोसी देशों द्वारा लंबी दूरी और बहु-वारहेड मिसाइल तकनीक पर कार्य किया जा रहा है, भारत की यह प्रगति रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ये सभी परीक्षण डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और सशस्त्र बलों की निगरानी में संपन्न हुए। डीआरडीओ प्रमुख ने इन अभियानों में शामिल वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और रक्षा बलों के समन्वय की सराहना की। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता देश की वायु और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान करेगी।


