हांगकांग : चीन ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए लाओस में एक नया एयरबेस स्थापित किया है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने 29 सितंबर 2026 को पहली बार इस बेस के संचालन की जानकारी सार्वजनिक की। मंत्रालय के अनुसार, लाओस के बान कीन एयरपोर्ट पर चीन-लाओस संयुक्त सहायता एवं प्रशिक्षण केंद्र और चीन-लाओस मैत्री विमानन अकादमी ने आधिकारिक रूप से काम शुरू कर दिया है।
इस समारोह में लाओस के रक्षा मंत्री खामलियेंग ओउथाकायसन भी मौजूद रहे। यह घटनाक्रम जून में लाओ राष्ट्रपति थोंगलून सिसौलिथ की बीजिंग यात्रा के बाद सामने आया है। उस दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन और लाओस के बीच राष्ट्रीय रक्षा सहित विभिन्न मुद्दों पर रणनीतिक संवाद बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
वियंतियाने से करीब 50 किलोमीटर दूर है एयरबेस
बान कीन एयरबेस लाओस की राजधानी वियंतियाने से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। यहां करीब 2,000 मीटर लंबा पक्का रनवे, टैक्सीवे, पार्किंग एप्रन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और पांच हैंगर बनाए गए हैं। निर्माण का काम पिछले वर्ष के अंत में शुरू हुआ था और अभी भी कुछ कार्य जारी हैं।
यह इलाका वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य और सीआईए गतिविधियों से जुड़े लीमा साइट 44 के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। नई सुविधा ऐसे समय में सामने आई है जब चीन दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य पहुंच लगातार बढ़ा रहा है।
चीन का कहना है कि यह केंद्र मुख्य रूप से लाओस की वायुसेना के पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए बनाया गया है। चीनी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने तथा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देना है।
लाओस की छोटी वायुसेना, चीन पर बढ़ सकती है निर्भरता
लाओस की वायुसेना अपेक्षाकृत छोटी है और उसके पास रूसी तथा चीनी मूल के सीमित विमान और हेलीकॉप्टर हैं। इनमें परिवहन विमान, जेड-9 हेलीकॉप्टर, एलई-500 प्रशिक्षण विमान और के-8डब्ल्यू जेट ट्रेनर शामिल हैं। लाओस की वायुसेना के प्रमुख ठिकानों में वियंतियाने-वाट्टे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और उत्तर-पूर्व में शियेंगखुआंग शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रशिक्षण केंद्र के जरिए चीन लाओस की सैन्य प्रशिक्षण व्यवस्था और भविष्य के रक्षा उपकरणों पर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। कुछ रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई है कि चीन अपने जेएल-8 प्रशिक्षण विमानों को यहां तैनात कर सकता है और लाओस के के-8डब्ल्यू विमानों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
बान कीन की भौगोलिक स्थिति भी चीन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह चीन-लाओस रेलवे कॉरिडोर के नजदीक है, जिससे चीन से सैन्य कर्मियों और उपकरणों की आवाजाही आसान हो सकती है। साथ ही, राजधानी के करीब होने और अपेक्षाकृत समतल भूभाग के कारण यह क्षेत्र विमान प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त माना जाता है।
वियतनाम के लिए बढ़ सकती है चिंता
नए एयरबेस का रणनीतिक महत्व वियतनाम के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन और वियतनाम के बीच 1979 में युद्ध हो चुका है। बान कीन में मौजूदगी से चीनी सेना को अपने दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र से करीब 400 किलोमीटर और आगे इंडोचाइना में सैन्य पहुंच मिल सकती है। यह स्थान वियतनाम की दिशा में भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस सुविधा का इस्तेमाल केवल प्रशिक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास और भविष्य में अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए भी कर सकता है।
कंबोडिया के बाद लाओस में दूसरी अहम मौजूदगी
लाओस में नया एयरबेस चीन की दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती सैन्य मौजूदगी का हिस्सा माना जा रहा है। कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर भी चीन की महत्वपूर्ण पहुंच है। दोनों देशों ने अप्रैल 2025 में वहां संयुक्त सहायता एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया था। इस सुविधा के विस्तार के लिए चीन ने आर्थिक मदद दी थी और वहां चीनी युद्धपोतों की मौजूदगी भी देखी गई है।
हालांकि, कंबोडिया लगातार यह कहता रहा है कि रीम बेस किसी एक देश के लिए विशेष रूप से आरक्षित नहीं है। जनवरी 2026 में अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत यूएसएस सिनसिनाटी भी वहां पहुंचा था।
चीन और कंबोडिया के बीच नियमित गोल्डन ड्रैगन सैन्य अभ्यास भी होते हैं। इसके साथ ही कंबोडिया ने अमेरिका के साथ भी संयुक्त सैन्य अभ्यास दोबारा शुरू किए हैं। ऐसे में कंबोडिया चीन और अमेरिका दोनों के साथ अपने सुरक्षा संबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश करता दिखाई देता है।
चीन की पहली विदेशी वायुसेना-केंद्रित सुविधा
लाओस का बान कीन केंद्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे चीन के बाहर पीएलए की पहली ऐसी सुविधा माना जा रहा है जो मुख्य रूप से वायुसेना से जुड़ी है। चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा पहले से मौजूद है, लेकिन उसका प्रमुख उपयोग नौसैनिक गतिविधियों, समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और क्षेत्रीय सैन्य सहयोग के लिए होता है।
लाओस की सुविधा चीन को दक्षिण-पूर्व एशिया में अपेक्षाकृत स्थायी वायुसेना उपस्थिति स्थापित करने का अवसर दे सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वहां कितने चीनी सैनिक, विमान या अन्य सैन्य संसाधन तैनात किए जाएंगे।
चीन का बढ़ता वैश्विक सैन्य नेटवर्क
अमेरिकी रक्षा विभाग ने दिसंबर 2025 में चीन की सैन्य क्षमता पर जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि चीन विदेशों में सैन्य सुविधाएं स्थापित करने के लिए संभावित मेजबान देशों के सहयोग पर निर्भर है। रिपोर्ट में कई ऐसे देशों का उल्लेख किया गया था जहां चीन सैन्य पहुंच या ठिकानों की संभावनाओं पर विचार कर सकता है, लेकिन लाओस का नाम उस सूची में नहीं था।
अमेरिका के अनुसार, चीन विदेशों में ऐसे ठिकानों और सैन्य पहुंच का नेटवर्क विकसित करना चाहता है, जिससे वह लंबी दूरी पर अपनी सैन्य शक्ति को तैनात और कायम रख सके। हालांकि, चीन का मौजूदा विदेशी सैन्य नेटवर्क अभी अमेरिकी नेटवर्क की तुलना में काफी छोटा है।
बान कीन एयरबेस के सामने आने के बाद यह स्पष्ट है कि चीन दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य और रणनीतिक पहुंच को धीरे-धीरे विस्तार दे रहा है। लाओस में प्रशिक्षण केंद्र के रूप में शुरू हुई यह मौजूदगी आने वाले वर्षों में चीन-लाओस रक्षा संबंधों और पूरे इंडोचाइना क्षेत्र की रणनीतिक तस्वीर को प्रभावित कर सकती है।








