डेस्क : वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वर्ष 2027 के दौरान और बढ़ोतरी होने की आशंका है। उर्वरकों और खेती में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की बढ़ती लागत के साथ अल नीनो के कारण मौसम में संभावित बदलाव कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। एसएंडपी ग्लोबल की एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इन परिस्थितियों का असर आने वाले महीनों में अधिक स्पष्ट हो सकता है, जबकि खाद्य बाजारों पर इसका पूरा प्रभाव वर्ष 2027 तक दिखाई देने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अल नीनो का प्रभाव असाधारण रूप से गंभीर रहा, तो एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में सूखा और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इससे फसलों की पैदावार प्रभावित होने और वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ने का खतरा है।
खाद और डीजल की बढ़ती लागत से किसान परेशान
एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, उर्वरकों और डीजल की उपलब्धता तथा उनकी बढ़ती कीमतें किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। खेती में मशीनों के संचालन, सिंचाई और कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए डीजल आवश्यक है, जबकि उर्वरकों का उत्पादन काफी हद तक प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है। ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से कृषि उत्पादन की लागत भी बढ़ रही है, जिससे किसानों के मुनाफे पर असर पड़ रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि तेल की कीमतों में बदलाव का असर बाजार में तुरंत दिखाई दे सकता है, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों पर इसका प्रभाव आने में समय लगता है। किसान फसल बेचने से कई महीने पहले बीज, खाद और ईंधन खरीदते हैं। ऐसे में खेती की लागत में मौजूदा बढ़ोतरी का पूरा असर वर्ष 2027 में खाद्य बाजारों पर दिखाई दे सकता है।
जैव ईंधन की मांग भी बढ़ा रही दबाव
यूरोप और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के कारण डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे जैव ईंधन का उत्पादन अधिक आकर्षक हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में ईंधन बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली फसलों का मूल्य खाद्य फसलों की तुलना में अधिक हो सकता है। ऐसी स्थिति में खाद्य उत्पादन के लिए उपलब्ध भूमि और संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कृषि क्षेत्र इस समय कई चुनौतियों का एक साथ सामना कर रहा है। उर्वरकों और ऊर्जा की बढ़ती लागत, जैव ईंधन की मांग और मौसम में संभावित बदलाव खाद्य उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। जिन क्षेत्रों में लगातार कई फसल चक्रों के दौरान पर्याप्त उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं हुआ है, वहां उत्पादन पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
अनाज के सीमित भंडार से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट में यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक अनाज भंडार के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर होने को लेकर भी चिंता जताई गई है। यदि कई प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में एक साथ फसलें खराब होती हैं, तो सीमित भंडार के कारण वैश्विक आपूर्ति को संभालना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक उर्वरक उत्पादन में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है। फसलों की कीमतें बढ़ने से किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकता है, जिससे वे अधिक भूमि पर खेती करने और उर्वरकों का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। लेकिन उत्पादन और आपूर्ति को सामान्य होने में समय लगेगा। इस बीच उपभोक्ताओं को महंगे खाद्य पदार्थों का सामना करना पड़ सकता है।
एसएंडपी ग्लोबल ने स्पष्ट किया कि वैश्विक खाद्य संकट होना निश्चित नहीं है, लेकिन इसे दूर का खतरा मानकर नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। आने वाले महीनों में मौसम, ऊर्जा बाजार और कृषि लागत में होने वाले बदलाव यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि वर्ष 2027 में वैश्विक खाद्य आपूर्ति और कीमतों की स्थिति कैसी रहती है।









