डेस्क : भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान पर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में बुनियादी अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के लगातार दमन का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पार्वतनेनी ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद की ‘शांतिपूर्ण विवाद समाधान के तंत्र को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित खुली बहस में पाकिस्तान पर निशाना साधा।
राजदूत हरीश ने कहा कि पीओके में कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठन बनाने के अधिकार को लगातार दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि करीब आठ दशकों से पाकिस्तान के शासन तंत्र द्वारा अपनाई गई एक व्यापक नीति का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी दमन का यही सिलसिला दिखाई देता है। एक पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी, मुख्य विपक्षी दल पर चुनावी प्रतिबंध और सैन्य हस्तक्षेप के जरिए संविधान में किए गए बदलावों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन कदमों ने लोकतंत्र की बची-खुची छवि को भी नुकसान पहुंचाया है।
भारतीय राजदूत ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल विभाजनकारी एजेंडे के लिए करने के बजाय अपने देश की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान दे। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर गढ़े हुए विमर्श के जरिए घरेलू राजनीतिक लाभ हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।
राजदूत हरीश ने कहा कि जहां अन्य देशों में इसी तरह के घटनाक्रम की संयुक्त राष्ट्र में कड़ी आलोचना की जाती है, वहीं पाकिस्तान में जारी दमन को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय ध्यान नहीं मिलता।
उन्होंने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र के मंच के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता है, जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करता है। भारत के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से जुड़ा एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत के संप्रभु क्षेत्र पर किया गया अवैध कब्जा है।








