पर्यावरण सुरक्षा के लिए आकांक्षाओं का सीमाकरण जरूरी : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

0

जयपुर :  अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के पांचवें दिन अणुव्रत समिति जयपुर द्वारा अणुविभा केंद्र में ‘पर्यावरण दिवस कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को केवल बाहरी प्रयास नहीं, बल्कि मनुष्य की जीवनशैली और विचारों के परिष्कार से जुड़ा विषय बताया गया।

सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण की समस्या के मूल में मनुष्य की लोभी और लालची प्रवृत्ति है। सुविधावाद तथा विलासितापूर्ण जीवनशैली ने प्रकृति पर दबाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की मनःस्थिति का परिष्कार किए बिना पर्यावरण की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

मुनिश्री ने उपस्थित जनसमुदाय को बिजली और पानी का अपव्यय नहीं करने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने तथा पेड़ों की रक्षा करने का संकल्प भी दिलाया।

मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि मनुष्य की असीम आकांक्षाओं ने पर्यावरण की समस्या को और जटिल बना दिया है। आवश्यकताओं की पूर्ति संभव है, लेकिन आकांक्षाओं की पूर्ति कभी नहीं हो सकती। इसलिए प्रकृति के संरक्षण के लिए इच्छाओं और उपभोग पर संयम आवश्यक है।

कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी श्री अविनाश नाहर ने पर्यावरण संरक्षण के साथ नशामुक्त परिवार और नशामुक्त समाज की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। अणुव्रत समिति जयपुर के अध्यक्ष श्री विनोद जी बैद ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि ‘निज पर शासन-फिर अनुशासन’ के जीवन सूत्र को अपनाकर ही पर्यावरण और समाज को सुरक्षित बनाया जा सकता है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को अणुव्रत आचार संहिता की शपथ भी दिलाई गई।

कार्यक्रम का संयोजन समिति की मंत्री श्रीमती जयश्री सिद्धा ने किया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से आह्वान किया कि “हम नशा छोड़ेंगे, परिवार जोड़ेंगे और पर्यावरण सुधारेंगे।” उन्होंने कहा कि सामूहिक संकल्प और संयमित जीवनशैली से ही इस दिशा में सार्थक परिवर्तन संभव है।

इस अवसर पर तेरापंथी सभा मंत्री श्री राजकुमार जी बाफना, शहर एवं सी. स्कीम महिला मंडल की अध्यक्षा एवं मंत्री श्रीमती कौशल्या जी जैन, श्रीमती कनक जी आंचलिया, श्रीमती पायल जी जैन, श्रीमती राजश्री जी बाफना, ते.यु.प. अध्यक्ष श्री प्रवीण जी जैन, श्री अशोक जी शर्मा सहित अनेक गणमान्य जनों ने पर्यावरण शुद्धि एवं संरक्षण के विषय में अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में श्री कमलेश जी बरड़िया, श्री नरेन्द्र जी चिंड़ालिया, श्री सौरभ जी जैन, श्री शक्रेन्द्र जी जैन, श्री गणपत जी भंडारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, समाजजन एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा केवल कानूनों से नहीं, बल्कि संयमित जीवन, सीमित इच्छाओं और शुद्ध विचारों से भी होती है।