नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को विस्तार और विकास के लिए दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को मंजूरी दे दी। इस फंड के माध्यम से विकास की क्षमता रखने वाले छोटे और मध्यम उद्यमों में प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश किया जाएगा, ताकि उन्हें बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सके।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि हाल में न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय एसएमई के लिए अवसरों का दायरा बढ़ा है। इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस फंड की स्थापना की गई है।
वैष्णव ने कहा कि फंड का उद्देश्य एसएमई को दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराना है और फंड का आधे से अधिक हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र पर केंद्रित एमएसएमई को दिया जाएगा।
सरकार के अनुसार, एसएमई ग्रोथ फंड के तहत उच्च क्षमता वाले ऐसे उद्यमों को ‘पेशेंट ग्रोथ इक्विटी कैपिटल’ उपलब्ध कराया जाएगा, जिनके कारोबार में मजबूती और विस्तार की स्पष्ट संभावना है। इससे कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने, रणनीतिक निवेश करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
फंड के तहत गठित वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में सरकार कुल 10,000 करोड़ रुपये का योगदान करेगी। विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों के औद्योगिक क्लस्टरों में काम करने वाले एसएमई को भी निवेश के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस पहल से छोटे और मध्यम उद्यमों को पारंपरिक ऋण के अलावा दीर्घकालिक जोखिम पूंजी उपलब्ध होगी। इससे नवाचार, अधिग्रहण, तकनीकी बदलाव और कारोबार के विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
सरकार के मुताबिक, यह फंड देश में बड़े और प्रतिस्पर्धी भारतीय उद्यमों की नई श्रृंखला तैयार करने में मदद करेगा। साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश बढ़ने से स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
एसएमई ग्रोथ फंड सरकार की डिजिटलाइजेशन, ऋण सुविधा, कारोबार सुगमता, सार्वजनिक खरीद, स्टार्टअप प्रोत्साहन और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी मौजूदा योजनाओं का पूरक होगा। सरकार ने इसे विकसित भारत-2047 के व्यापक लक्ष्य के तहत उच्च विकास क्षमता वाले एसएमई, नवाचार आधारित औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया है।







