ईएमआई कम होने की उम्मीद को झटका, रिजर्व बैंक ने दिए सख्ती के संकेत

0

डेस्क : कर्ज की मासिक किस्त कम होने का इंतजार कर रहे लोगों को भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले से झटका लगा है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने करीब चार साल बाद पहली बार नीतिगत ब्याज दर में एक चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही रेपो दर बढ़कर साढ़े पांच प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले से निकट भविष्य में कर्ज की ब्याज दरों में कमी की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।

महंगाई बनी बड़ी चिंता

रिजर्व बैंक के इस फैसले के पीछे बढ़ती महंगाई प्रमुख कारणों में शामिल है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान भी बढ़ाया है। कमजोर मानसून के कारण आने वाले समय में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

कर्ज की किस्त पर पड़ सकता है असर

रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा असर बैंकों की कर्ज दरों पर पड़ सकता है। यदि बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो नए कर्ज लेने वालों के साथ-साथ परिवर्तनीय ब्याज दर वाले पुराने कर्जदारों की मासिक किस्त भी बढ़ सकती है। घर, वाहन और अन्य बड़े कर्ज लेने वालों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

रुपये की कमजोरी भी चिंता का कारण

भारतीय मुद्रा में आई कमजोरी भी केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रुपये के कमजोर होने से विदेश से आने वाले कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आने वाले समय में घरेलू महंगाई पर भी पड़ सकता है।

आर्थिक वृद्धि को लेकर उम्मीद बरकरार

हालांकि महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है, लेकिन देश की आर्थिक वृद्धि को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख सकारात्मक है। चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में विकास की गति मजबूत बनी हुई है।

कुल मिलाकर, रिजर्व बैंक के ताजा फैसले से फिलहाल कर्ज की मासिक किस्त सस्ती होने की उम्मीदों को झटका लगा है। आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।