डेस्क : अभिनेता शहजाद खान ने अपने दिवंगत पिता और दिग्गज अभिनेता अजीत खान से जुड़ी एक ऐसी सीख साझा की है, जिसने उनके फिल्मी सफर की दिशा तय कर दी। अजीत खान ने बेटे को फिल्म इंडस्ट्री में प्रवेश के लिए किसी तरह की सिफारिश या मदद देने से साफ इनकार कर दिया था। उनका संदेश था—न कोई शॉर्टकट, न सिफारिश, सिर्फ मेहनत।
एएनआई से बातचीत में शहजाद खान ने बताया कि बचपन से ही उनका रुझान अभिनय, मंच और थिएटर की ओर था। स्कूल के दिनों में भी वह स्टेज कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे। जब उन्होंने अभिनेता बनने का फैसला किया तो हिम्मत जुटाकर अपने पिता से मदद मांगी। हालांकि, अजीत खान ने उनकी मदद करने के बजाय उन्हें खुद संघर्ष करने की सलाह दी।
शहजाद के मुताबिक, उनके पिता ने साफ शब्दों में कहा था कि वह उनके लिए कोई फिल्म नहीं बनाएंगे और इंडस्ट्री में किसी से उनकी सिफारिश भी नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह तक कहा कि जरूरत पड़े तो लोगों को यह भी न बताएं कि वह उनके बेटे हैं। अजीत खान का मानना था कि अगर शहजाद अपने दम पर मेहनत करेंगे तो यह उनके लिए ज्यादा बेहतर होगा।
शहजाद ने बताया कि उनके पिता को शुरू में लगता था कि कुछ महीनों की मुश्किलों के बाद वह घर लौट आएंगे, क्योंकि उन्होंने बचपन से ही सुविधाओं और ऐशो-आराम की जिंदगी देखी थी। लेकिन शहजाद ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि उनके पिता खुद संघर्ष करके इंडस्ट्री में आगे बढ़े थे और वही संघर्ष उन्हें भी करना था।
शहजाद खान ने वर्ष 1988 में फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ से बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म में आमिर खान और जूही चावला मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में हास्य और नकारात्मक भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 1994 में आई चर्चित फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ में भल्ला के किरदार से उन्हें खास पहचान मिली। फिल्म में आमिर खान और सलमान खान मुख्य भूमिकाओं में थे।
फिल्मों के अलावा शहजाद खान ने टेलीविजन पर भी अपनी पहचान बनाई। बच्चों के लोकप्रिय धारावाहिक ‘शाका लाका बूम बूम’ में टाइगर का किरदार उनके चर्चित किरदारों में शामिल रहा। ‘बरसात’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ और ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया।
वहीं, उनके पिता अजीत खान ने चार दशक से अधिक समय तक हिंदी सिनेमा में काम किया। ‘बेकसूर’, ‘नास्तिक’, ‘बड़ा भाई’, ‘मिलन’, ‘बारा दरी’, ‘मुगल-ए-आजम’ और ‘नया दौर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को याद किया जाता है। 76 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था।








