डेस्क : त्योहारी सीजन में मोबाइल, टीवी, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और दुकानों पर नो-कॉस्ट ईएमआई के ऑफर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। इन योजनाओं में महंगे उत्पादों की कीमत आसान मासिक किस्तों में चुकाने की सुविधा मिलती है। हालांकि, नो-कॉस्ट ईएमआई का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि ग्राहक को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।
वित्तीय जानकारों के अनुसार, ऐसी योजनाओं में ब्याज की भरपाई विक्रेता या कंपनी की ओर से दी जाने वाली छूट के माध्यम से की जा सकती है। कुछ मामलों में ग्राहक को नकद भुगतान पर मिलने वाली छूट छोड़नी पड़ती है। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी और अन्य शुल्क भी कुल खर्च बढ़ा सकते हैं।
नकद भुगतान और ईएमआई की कीमत में करें तुलना
मान लीजिए, किसी उत्पाद की कीमत एक लाख रुपये है और नकद भुगतान करने पर छह हजार रुपये की छूट मिल रही है। ऐसी स्थिति में ग्राहक को उत्पाद 94 हजार रुपये में मिल सकता है। वहीं, नो-कॉस्ट ईएमआई चुनने पर यदि यह छूट नहीं मिलती, तो ग्राहक को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क जुड़ने से खर्च और बढ़ सकता है।
इसलिए केवल मासिक किस्त की राशि देखकर खरीदारी का फैसला करना उचित नहीं है। ग्राहक को यह देखना चाहिए कि पूरी अवधि में सभी किस्तों और शुल्कों को मिलाकर कुल कितना भुगतान करना होगा।
लोन की शर्तों को नजरअंदाज न करें
नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनने से पहले बैंक या वित्तीय संस्थान की शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। प्रोसेसिंग फीस, समय से पहले लोन चुकाने पर लगने वाला शुल्क, देरी से भुगतान की पेनाल्टी और किस्त बाउंस होने की स्थिति में लगने वाले चार्ज की जानकारी लेनी चाहिए।
इसके साथ ही यह भी जांचना चाहिए कि ईएमआई चुनने से नकद खरीदारी पर मिलने वाला कैशबैक, एक्सचेंज बोनस या अन्य विशेष छूट तो नहीं छूट रही है।
कब फायदेमंद हो सकती है नो-कॉस्ट ईएमआई?
यदि ईएमआई पर उत्पाद की कुल कीमत नकद भुगतान के बराबर है, कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं है और ग्राहक को दूसरी छूटों का नुकसान भी नहीं हो रहा है, तो यह विकल्प उपयोगी हो सकता है। इससे एकमुश्त बड़ी रकम खर्च करने के बजाय भुगतान को कई महीनों में बांटा जा सकता है।
हालांकि, कई उत्पादों की किस्तें एक साथ चलने से मासिक बजट पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपनी आय, नियमित खर्च और भुगतान क्षमता का आकलन करना जरूरी है।
ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह: नो-कॉस्ट ईएमआई को पूरी तरह मुफ्त मानने के बजाय नकद कीमत, उपलब्ध छूट, कुल किस्तों, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों की तुलना करें। खरीदारी का सही फैसला वही है, जिसमें सुविधा के साथ कुल खर्च भी कम हो।








