भक्ति, शक्ति और साधना का पर्व शारदीय नवरात्रि आज से आरंभ

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शक्ति, साधना और भक्ति का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि आज, 11 अक्टूबर से आरंभ हो रहा है। रविवार की सुबह से ही देशभर के मंदिरों और घरों में मां दुर्गा की आराधना की विशेष तैयारियां देखने को मिलेंगी। नौ दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करेंगे। नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ देवी उपासना का विधिवत शुभारंभ होगा।

सनातन परंपरा में नवरात्रि को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शक्ति जागरण, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक चेतना का पर्व माना गया है। यह अवसर मनुष्य को अपने भीतर की नकारात्मकता पर विजय प्राप्त करने और सद्भाव, संयम तथा सकारात्मकता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कलश स्थापना के लिए 3 घंटे 53 मिनट का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त बताया गया है। इस अवधि में श्रद्धालु विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में किए गए मांगलिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। हालांकि, पूजा के समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर संभव है।

प्रथम दिन मां शैलपुत्री की होगी पूजा

नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां का स्वरूप प्रकृति, धैर्य, स्थिरता और अटूट संकल्प का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की उपासना से भक्तों को आत्मबल, मानसिक शांति और जीवन में दृढ़ता प्राप्त होती है। श्रद्धालु देवी को पुष्प, अक्षत, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करेंगे।

ऐसे करें कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। परंपरा के अनुसार, पूजा स्थल पर मिट्टी के पात्र में जौ बोकर कलश स्थापित किया जाता है। कलश में स्वच्छ जल भरकर उसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का आदि रखे जा सकते हैं। इसके मुख पर आम या अशोक के पत्ते तथा ऊपर नारियल स्थापित करने की परंपरा भी प्रचलित है।

कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा और मां शैलपुत्री का ध्यान करें। देवी मंत्रों का जाप, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ तथा आरती कर पूजा संपन्न करें। पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और सात्विक भाव का विशेष ध्यान रखें। अनुष्ठान की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

नौ दिनों तक गूंजेगा मां दुर्गा का जयघोष

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाएगी।

इन दिनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होंगे। अनेक श्रद्धालु व्रत रखकर साधना करेंगे, जबकि घरों में दुर्गा पाठ और देवी आरती के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बनेगा।

शक्ति उपासना के साथ आत्मचिंतन का पर्व

नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश जीवन में शक्ति और करुणा, साहस और विनम्रता तथा आस्था और सदाचार के संतुलन को स्थापित करना है। मां दुर्गा की उपासना हमें यह स्मरण कराती है कि कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य, विवेक और दृढ़ संकल्प के साथ किया जा सकता है।

यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय और धर्म की स्थापना का प्रतीक भी है। नवरात्रि के नौ दिन स्वयं के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में सद्भाव बढ़ाने का संकल्प लेने का अवसर हैं। मां दुर्गा की आराधना के साथ श्रद्धालु यही कामना करेंगे कि हर घर में सुख-शांति बनी रहे और जीवन में नई ऊर्जा, विश्वास तथा मंगल का संचार हो।