नारी शक्ति सृजन और संस्कारों की आधारशिला : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर :  नारी केवल परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि संस्कारों की संवाहक, सृजन की शक्ति और समाज के नव निर्माण की आधारशिला भी है। उसकी ममता में करुणा, विचारों में विवेक और व्यक्तित्व में अद्भुत सामर्थ्य समाहित है। नारी की इसी शक्ति, आत्मविश्वास और प्रेरणादायी स्वरूप को अभिव्यक्त करने के उद्देश्य से शनिवार को अणुविभा केन्द्र में तेरापंथ महिला मंडल, शहर की ओर से अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन में ‘या देवी सर्वभूतेषु’ एवं ‘मेरी शक्ति की कहानी’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

कार्यशाला में महिला मंडल की अनेक बहिनों ने गणवेश में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई और अपने जीवन के प्रेरक अनुभवों एवं संघर्षों से जुड़ी घटनाओं को साझा किया। इन प्रसंगों के माध्यम से नारी के आत्मबल, धैर्य, साहस और सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रेरक चित्र सामने आया।

मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कार्यशाला की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “नारी सबसे न्यारी, सब पर भारी। उस शक्ति स्वरूपा नारी का जग आभारी।” उन्होंने कहा कि संस्कारी नारी केवल जन्मदात्री ही नहीं, बल्कि जीवन निर्मात्री भी होती है। नारी अपने संस्कारों, संवेदनाओं और जीवन मूल्यों के माध्यम से परिवार एवं समाज को दिशा प्रदान करती है। उसकी शक्ति का वास्तविक स्वरूप उसके आत्मविश्वास, त्याग, विवेक और सृजनशीलता में दिखाई देता है।

तेरापंथ महिला मंडल, शहर की अध्यक्ष श्रीमती कौशल्या जी जैन ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि यह कार्यशाला समाज को नारी की क्षमताओं और सामर्थ्य से परिचित कराने का महत्वपूर्ण अवसर है। आज की नारी घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर धरती से आसमान तक अपनी पहचान स्थापित कर रही है। उन्होंने महिलाओं को अपनी अंतर्निहित शक्तियों को पहचानने और दूसरों के लिए प्रेरणा बनने का संदेश दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा जी बैद ने की। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करने के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा भी की।

‘मेरी शक्ति की कहानी’ विषय पर आयोजित कहानी प्रतियोगिता में श्रीमती राजरानी जी जैन ने प्रथम, श्रीमती निधि जी लोढ़ा ने द्वितीय तथा श्रीमती कृतिका जी कोचर एवं श्रीमती वंदना जी पोखरना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, कला प्रतियोगिता में श्रीमती सुधा जी सिंघवी प्रथम, श्रीमती मलिया जी बरड़िया द्वितीय तथा श्रीमती चंचल जी दुगड़ तृतीय स्थान पर रहीं।

कार्यक्रम का कुशल संचालन मंडल की मंत्री श्रीमती पायल जी जैन एवं श्रीमती पूजा जी संघवी ने किया। इस अवसर पर डॉ. श्रीमती कांता जी छाजेड़ तथा मंडल की पदाधिकारी बहिनों ने अतिथियों को साहित्य भेंट कर सम्मानित किया। श्रीमती वीना जी चौहान एवं डॉ. नीना जी शर्मा ने प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका निभाई।

कार्यशाला ने नारी के भीतर निहित शक्ति, संस्कार और आत्मविश्वास को पहचानने का संदेश दिया। साथ ही यह प्रेरणा भी दी कि जब नारी अपनी क्षमताओं को पहचानकर आगे बढ़ती है, तो वह न केवल अपना जीवन संवारती है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।