कमलनाथ की पैतृक जमीन का मामला पहुंचा थाने, कथित फर्जीवाड़े में कार्रवाई

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डेस्क : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ के परिवार की उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में स्थित करीब 90 बीघा जमीन से जुड़ा मामला सामने आया है। नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर उर्फ जट्टीवाला गांव में स्थित इस जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में उनके पिता महेंद्रनाथ का नाम दर्ज था। उनके निधन के करीब 22 साल बाद भी जमीन का नामांतरण नहीं हुआ था। अब प्रशासन ने कमलनाथ और उनके परिवार के पक्ष में विरासत दर्ज कर दी है।

जानकारी के अनुसार, कमलनाथ की ओर से 18 मई 2026 को जमीन के चार गाटा नंबरों की खतौनी में विरासत दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन में कमलनाथ और उनकी बहनों नीता पुरी तथा रीता जोशी को वारिस बताया गया था। आरोप है कि लेखपाल की रिपोर्ट में जमीन को विवादित बताए जाने के बाद यह आवेदन करीब पांच महीने तक लंबित रहा।

इसी बीच कमलनाथ को जानकारी मिली कि जमीन के एक हिस्से पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। करीब 30 बीघा जमीन को हड़पने की साजिश के आरोप सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया। इसके बाद तहसील प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड में विरासत दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की।

फर्जी वसीयत के आरोप में प्राथमिकी

इस मामले में नजीबाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि धर्मपाल सिंह, जसबिंदर सिंह ढिल्लो, विजय शंकर पांडेय और हल्का लेखपाल डेविड कुमार ने कथित तौर पर साजिश रचकर जमीन को अपने नाम कराने और बेचने का प्रयास किया। पुलिस ने धर्मपाल सिंह और विजय शंकर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में अन्य आरोपों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

नजीबाबाद के तहसीलदार संतोष यादव के अनुसार, महेंद्रनाथ के निधन के बाद उनके पुत्र कमलनाथ की ओर से वारिस दर्ज कराने का आवेदन दिया गया था और अब राजस्व रिकॉर्ड में विरासत दर्ज कर दी गई है।