डेस्क : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 28 वर्षीय युवक शुक्रुल्लाह बलूच की कथित तौर पर जबरन गुमशुदगी के बाद हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने युवक को हिरासत में लेने के बाद उसकी हत्या कर दी। संगठन के अनुसार, युवक का शव वाशुक जिले के पातक क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की सड़क के किनारे मिला। शव पर कथित तौर पर यातना के निशान भी थे।
बलूच यकजहती कमेटी के बयान के मुताबिक, अब्दुल नबी का पुत्र शुक्रुल्लाह वाशुक जिले के कप्पर गांव का निवासी था। आरोप है कि सात सितंबर 2026 को पाकिस्तानी सेना के जवानों ने उसे पातक क्षेत्र में सीपीईसी मार्ग से जबरन उठा लिया था। संगठन का दावा है कि वह दस दिनों तक हिरासत में रहा और 17 सितंबर को उसकी हत्या कर दी गई।
समिति ने बताया कि शुक्रुल्लाह एक सामान्य युवक था, जो अपने परिवार की आजीविका चलाने और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए काम करता था। संगठन ने इस घटना के लिए पाकिस्तानी सेना और कथित तौर पर फ्रंटियर कोर (एफसी) के जवानों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बीवाईसी के अनुसार, शुक्रुल्लाह के लापता होने के बाद से उसका परिवार गहरे तनाव में था। उसकी मां, बहनें और भाई लगातार उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे। शव मिलने के बाद परिवार की उम्मीदें टूट गईं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की अपील
बलूच यकजहती कमेटी ने ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ से मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। संगठन ने बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।
समिति ने स्वतंत्र पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों से भी ऐसे मामलों की निगरानी करने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण करने का आग्रह किया है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी, हिरासत में मौत और नागरिकों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर मानवाधिकार समूह समय-समय पर चिंता जताते रहे हैं। शुक्रुल्लाह बलूच का मामला भी इन्हीं आरोपों के बीच सामने आया है।








