संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, कहा—सेना ही कानून और सेना ही शासन

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डेस्क : संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों, प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के शासन को लेकर पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए उसे अपने रिकॉर्ड पर ध्यान देने की नसीहत दी। भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को उसकी घरेलू समस्याओं से ध्यान भटकाने की रणनीति करार दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान दूसरों को कानून के शासन का पाठ पढ़ाता है, जबकि उसके अपने यहां सेना का प्रभाव, न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल और राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई चिंता का विषय हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर मिथिली आर. ने महासभा की छठी समिति में ‘राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन’ विषय पर पाकिस्तान की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि वहां सेना ही शासन और कानून का निर्धारण करती दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाए जाते हैं और राजनीतिक विपक्ष को दबाया जाता है।

मिथिली ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की स्थापना के बाद से ही वहां की आबादी में अल्पसंख्यकों का अनुपात लगातार घटा है। उन्होंने विदेशी मीडिया के कामकाज पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर समाचारों की रिपोर्टिंग के लिए विदेशी मीडिया को अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा। भारत ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि कानून का शासन सत्ता में बैठे लोगों पर अपने नागरिकों के हित में काम करने की जिम्मेदारी डालता है, लेकिन पाकिस्तान बार-बार इस जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति पाकिस्तान का रवैया ही उसकी वास्तविक चिंता को उजागर करता है। भारत के अनुसार, पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने के बजाय अपने नागरिकों से किए गए वादों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर को बताया संतुलित और जवाबी कार्रवाई

भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी उल्लेख किया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इस हमले के जवाब में शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर एक संतुलित और परिस्थितियों के अनुरूप कार्रवाई थी।

उन्होंने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के खिलाफ बार-बार लगाए जाने वाले आरोप पाकिस्तान को अपने नागरिकों से किए गए वादों से मुंह मोड़ने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकते। सैन्य कार्रवाई के परिणामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पाकिस्तान की जीत के दावों पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि बमबारी से प्रभावित हवाई अड्डों और नष्ट हुए हैंगरों को जीत माना जाता है, तो पाकिस्तान ऐसा मानने के लिए स्वतंत्र है।

परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा भारत

इससे पहले शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत ने पाकिस्तान को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकियों के प्रति आगाह किया। भारत ने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों को सामान्य कूटनीतिक या रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और भारत किसी भी स्थिति में परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रथम सचिव अनमोल शेर सिंह बेदी ने कहा कि भारत की सैन्य नीति पूरी तरह रक्षात्मक है और यह देश की सुरक्षा आवश्यकताओं से निर्धारित होती है, न कि किसी विशेष देश को निशाना बनाने के उद्देश्य से। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की कार्रवाई को आत्मरक्षा में की गई सीमित, लक्षित और तनाव न बढ़ाने वाली कार्रवाई बताया।

बेदी ने भारत की रणनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का उचित जवाब दिया जाएगा। भारत परमाणु धमकी के सामने नहीं झुकेगा और आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों तथा उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि गैर-राज्य तत्वों के माध्यम से हिंसा कराने से किसी देश की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती और न ही भारत का आत्मरक्षा का अधिकार कमजोर पड़ता है। उनके अनुसार, तनाव बढ़ने या घटने का आकलन केवल बयानों से नहीं, बल्कि संबंधित पक्षों के वास्तविक आचरण से किया जाना चाहिए।

भारत ने जवाबदेही को शांति की शर्त बताया

भारतीय प्रतिनिधि ने क्षेत्रीय अस्थिरता पर चिंता जताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अक्सर एक जैसा घटनाक्रम देखने को मिलता है—पहले उकसावे की कार्रवाई, फिर जिम्मेदारी से इनकार और जवाब मिलने के बाद संयम बरतने की अपील। उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होते, तब संकट सत्ता बनाए रखने का माध्यम बन सकता है और अस्थिरता उनके हित में काम करने लगती है।

भारत ने दोहराया कि वह किसी संघर्ष की इच्छा नहीं रखता और सभी देशों के साथ शांति चाहता है। हालांकि, बेदी ने स्पष्ट किया कि गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों के लिए जवाबदेही तय किए बिना शांति स्थायी नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में शांति केवल दो संकटों के बीच का अंतराल बनकर रह जाती है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के इन बयानों से स्पष्ट है कि नई दिल्ली आतंकवाद, परमाणु धमकी और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर पाकिस्तान के प्रति अपने रुख में कोई ढील देने के पक्ष में नहीं है। भारत ने एक बार फिर जोर दिया कि शांति की दिशा में सार्थक प्रगति के लिए आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई और जिम्मेदारी स्वीकार करना आवश्यक है।