मामले ने उस समय तूल पकड़ा, जब एक छात्रा ने अपने पिता को प्रोफेसर की ओर से भेजे गए कथित संदेश दिखाए। इसके बाद छात्रा के पिता ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्यों से संपर्क किया। संगठन ने इस मुद्दे को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाया और नागपुर पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की।
हैदराबाद में पूर्व कार्यकाल की भी होगी जांच
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है। यह समिति नागपुर में सामने आए आरोपों के साथ ही प्रोफेसर के हैदराबाद स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में पूर्व कार्यकाल के दौरान उनके आचरण से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल करेगी।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने तक संबंधित प्रोफेसर कैंपस में नहीं आएंगे। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और रविवार तक इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी।
प्रदर्शन के बाद प्रशासन और शिकायतकर्ताओं के बीच बैठक
मामले को लेकर शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। नागपुर पुलिस के जोन-5 के अधिकारी नित्यानंद झा के अनुसार, सुबह करीब 11:30 बजे 15 से 17 लोग परिसर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत कराई, जिसके बाद प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजने का फैसला लिया गया।
शाम करीब 6:45 बजे शिकायतकर्ता छात्रा और उसके पिता के साथ 15 से 20 लोगों का एक अन्य समूह भी परिसर पहुंचा। इसी दौरान जांच समिति करीब 100 से 120 विद्यार्थियों के साथ खुली चर्चा कर रही थी। बाद में पुलिस की मध्यस्थता से शिकायतकर्ता समेत छह से सात लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच समिति से मुलाकात की।
निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन
बैठक के दौरान जांच समिति ने शिकायतकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि मामले से जुड़े सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी और निर्धारित समय के भीतर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने विद्यार्थियों को घटनाक्रम की जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई। अब मामले में आगे की कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी।
फिलहाल, प्रोफेसर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। जांच पूरी होने से पहले आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।









