फेस्टिव सेल में खर्च पर रखें लगाम, बचत के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

0

डेस्क : त्योहारों के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर मिलने वाले आकर्षक डिस्काउंट लोगों को खरीदारी के लिए लुभाते हैं। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और अन्य सामान पर छूट देखकर लोग कई बार जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं। आसान क्रेडिट और लोन की सुविधा भी खर्च बढ़ाने का कारण बन सकती है। ऐसे में यदि पहले से बजट तय नहीं किया जाए, तो त्योहार की खरीदारी घर के मासिक बजट पर भारी पड़ सकती है।

वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और अनावश्यक खर्च से बचने के लिए खरीदारी से पहले कुछ जरूरी नियम अपनाना फायदेमंद हो सकता है। इनसे त्योहार का आनंद लेने के साथ भविष्य की बचत को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

50-30-20 के नियम से करें बजट का प्रबंधन

मासिक आय का सही इस्तेमाल करने के लिए 50-30-20 का बजट नियम अपनाया जा सकता है। इसके तहत आय का 50 प्रतिशत हिस्सा जरूरी खर्चों, 30 प्रतिशत अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार अन्य खर्चों तथा 20 प्रतिशत बचत के लिए निर्धारित किया जाता है। जरूरी खर्चों में किराया, राशन और ईएमआई शामिल हो सकते हैं। त्योहारों की खरीदारी के लिए अलग से तय सीमा रखना बेहतर है, ताकि बचत प्रभावित न हो।

क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट इस्तेमाल करने से बचें

त्योहारों में क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। कार्ड की कुल लिमिट का 30 प्रतिशत से कम इस्तेमाल रखने का लक्ष्य एक उपयोगी वित्तीय आदत हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, तीन लाख रुपये की क्रेडिट लिमिट होने पर बकाया राशि 90 हजार रुपये से कम रखने की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही समय पर बिल का पूरा भुगतान करना भी जरूरी है, ताकि ब्याज और कर्ज का बोझ न बढ़े।

खरीदारी से पहले तय करें खर्च की सीमा

सेल में खरीदारी करने से पहले बजट तय करना और जरूरत के सामान की सूची बनाना जरूरी है। केवल छूट देखकर गैर-जरूरी वस्तुएं खरीदने से बचना चाहिए। अलग-अलग वेबसाइटों पर कीमतों की तुलना करने और अतिरिक्त शुल्क पर ध्यान देने से भी खर्च नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। खरीदारी के बाद कुल खर्च का हिसाब रखना भी उपयोगी है।

आपातकालीन फंड को रखें सुरक्षित

अचानक बीमारी, दुर्घटना या नौकरी से जुड़ी परेशानी जैसी परिस्थितियों में इमरजेंसी फंड आर्थिक सहारा देता है। सामान्य तौर पर तीन से छह महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम अलग रखने का सुझाव दिया जाता है। यदि किसी परिवार का मासिक जरूरी खर्च एक लाख रुपये है, तो तीन से छह लाख रुपये का आपातकालीन फंड बनाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इस रकम का इस्तेमाल त्योहारों की खरीदारी के बजाय आपात जरूरतों के लिए करना चाहिए।

बचत और निवेश को दें प्राथमिकता

वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए आय मिलते ही बचत के लिए तय रकम अलग करना बेहतर है। इसके लिए बैंक खाते से नियमित ट्रांसफर या अपनी जरूरत के अनुसार निवेश की व्यवस्था की जा सकती है। निवेश का विकल्प चुनते समय अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। त्योहारों के खर्च के कारण नियमित बचत और निवेश को लगातार टालने से बचना चाहिए।

समझदारी से करें खरीदारी

त्योहार खुशियां मनाने का अवसर हैं, लेकिन इनके लिए अपनी आर्थिक सुरक्षा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। बजट तय करना, क्रेडिट कार्ड का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना, आपातकालीन फंड सुरक्षित रखना और नियमित बचत करना ऐसी आदतें हैं, जो लंबे समय में आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं।