डेस्क : जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने भारतीय शेयर बाजार में नया इतिहास रच दिया है। इस इश्यू को एक करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिससे यह वैश्विक स्तर पर ऐसा करने वाला पहला आईपीओ बन गया। निवेशकों की इस अभूतपूर्व भागीदारी ने भारतीय पूंजी बाजार की बढ़ती ताकत और बड़े सार्वजनिक निर्गमों के प्रति लोगों के भरोसे को रेखांकित किया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुला था और 23 अक्टूबर 2026 को बंद हुआ। कंपनी ने इस निर्गम के माध्यम से करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा। आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा निर्धारित किया गया था।
वारी एनर्जीज का रिकॉर्ड पीछे छूटा
आवेदनों की संख्या के मामले में जियो प्लेटफॉर्म्स ने वारी एनर्जीज के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। वारी एनर्जीज के आईपीओ को लगभग 97 लाख आवेदन मिले थे। जियो के इश्यू में एक करोड़ से अधिक आवेदन आने से बाजार में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ इश्यू
आईपीओ को निवेशकों की विभिन्न श्रेणियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इश्यू कुल 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ। योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में करीब 70.55 गुना, गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में लगभग 14 गुना और खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया।
संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने भी इस निर्गम को चर्चा में बनाए रखा। कंपनी ने आईपीओ से पहले एंकर निवेशकों के माध्यम से लगभग 8,110 करोड़ रुपये जुटाए थे।
कर्ज घटाने और कारोबार बढ़ाने पर जोर
आईपीओ के तहत जारी नए शेयरों से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को कम करने में किया जाना है। इसके अलावा कंपनी की पूंजीगत जरूरतों और कारोबारी विस्तार की योजनाओं को भी इससे समर्थन मिलने की उम्मीद है।
जियो प्लेटफॉर्म्स दूरसंचार सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
शेयर बाजार के लिए अहम उपलब्धि
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को मिला रिकॉर्ड आवेदन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की व्यापक भागीदारी का संकेत है। हालांकि, आईपीओ को मिली भारी प्रतिक्रिया भविष्य में शेयर के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होती। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन और दीर्घकालिक कारोबारी संभावनाओं को ध्यान में रखना जरूरी है।









