रूस और यूक्रेन में फंसे भारतीयों की वापसी के प्रयास तेज, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

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डेस्क :  रूस और यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार दोनों देशों के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि रोजगार दिलाने के नाम पर संघर्ष से जुड़े कार्यों में फंसाए गए भारतीयों की रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस वार्ता में जायसवाल ने बताया कि यूक्रेन में मौजूद भारतीय नागरिकों की रिहाई को लेकर वहां की सरकार के साथ बातचीत चल रही है। भारतीय अधिकारी फंसे हुए नागरिकों से संपर्क बनाए रखने और उनकी स्थिति का जायजा लेने के लिए नियमित रूप से कांसुलर दौरे भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

रूस की सेना में शामिल भारतीय नागरिकों के मुद्दे पर भी विदेश मंत्रालय ने प्रयास जारी रहने की बात कही। जायसवाल के अनुसार, भारत सरकार रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि वहां की सशस्त्र सेनाओं में कार्यरत भारतीयों की सेवामुक्ति और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।

विदेश मंत्रालय ने इससे पहले भी नौकरी के नाम पर आकर्षक प्रस्ताव देने वाली फर्जी भर्ती एजेंसियों से सावधान रहने की अपील की है। मंत्रालय ने नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार के झूठे वादों के जाल में नहीं फंसने की सलाह दी है।

यूक्रेन से 22 हजार भारतीयों को निकालने का किया जिक्र

इस बीच, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि विदेशों में संकट का सामना कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी भलाई सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारत केवल परामर्श जारी करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जरूरत पड़ने पर नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाता है।

गोयल ने रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के समय यूक्रेन में मौजूद भारतीय नागरिकों की निकासी का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय वहां लगभग 22 हजार भारतीय थे, जिनमें अधिकांश छात्र शामिल थे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निकासी अभियान की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी। इसके लिए दिल्ली में एक विशेष टीम बनाई गई थी, जो अभियान का समन्वय करती थी। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में मदद के लिए चार वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों को पड़ोसी देशों में भेजा गया था।

गोयल ने कहा कि युद्ध की स्थिति गंभीर होने से पहले ही भारत सरकार ने यूक्रेन में रह रहे भारतीयों को स्वदेश लौटने की सलाह दी थी। हालांकि, संघर्ष शुरू होने के बाद निकासी अभियान और चुनौतीपूर्ण हो गया था।

मंत्री के अनुसार, भारत संकट के समय अपने नागरिकों की सहायता के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने में सहयोग करता है। उनके बयान से विदेशों में संकट के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की कूटनीतिक और प्रशासनिक कोशिशों पर जोर दिया गया।