ट्रांसजेंडर कानून के प्रभाव पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण

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डेस्क : ट्रांसजेंडर अधिकार कानून के महिलाओं के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में तीन केंद्रीय मंत्रालयों को नोटिस जारी किए हैं। याचिका में महिलाओं के आरक्षण, जेलों में व्यवस्था, खेल प्रतियोगिताओं और पुलिस कार्रवाई के दौरान मिलने वाली कानूनी सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

महिलाओं के अधिकारों पर असर को लेकर चिंता

‘विमेन्स डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया’ की ओर से दायर जनहित याचिका में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के प्रभाव पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि कानून में किए गए बदलावों का असर महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षण और विशेष कानूनी संरक्षण पर पड़ सकता है।

याचिका में स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों, महिला जेलों में व्यवस्था, खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी तथा गिरफ्तारी और तलाशी के दौरान महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

ट्रांसजेंडर अधिकारों के खिलाफ नहीं है याचिका

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि याचिका का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का विरोध करना नहीं है। उनका तर्क है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समान अधिकार और जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षण, लाभ और सुरक्षा उपायों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

तीन मंत्रालयों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से जवाब मांगा है।

अदालत ने इस याचिका को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाले अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया है। सुनवाई के दौरान एक ही विषय पर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल होने से होने वाली देरी का मुद्दा भी सामने आया।

केंद्र सरकार तैयार कर रही जवाब

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि संबंधित मामलों में सरकार अपना पक्ष रख रही है और इस याचिका में उठाए गए सवालों को भी जवाब में शामिल किया जाएगा।

मामले में अब केंद्र सरकार के जवाब और आगामी सुनवाई पर नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल महिलाओं के अधिकारों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े इन कानूनी सवालों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।