नई दिल्ली : देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के तीन करोड़ घुसपैठियों वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है। चिदंबरम ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए भाजपा अध्यक्ष से पांच सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा कि जिन तीन करोड़ लोगों को घुसपैठिया बताया जा रहा है, आखिर उनकी पहचान क्या है और क्या केंद्र तथा राज्य सरकारों ने उनकी सूची तैयार कर ली है?
नितिन नवीन ने क्या दावा किया था?
दरअसल, मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहा है। इसी विवाद के बीच भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि हटाए गए नामों में करीब 2.5 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। वहीं, लगभग छह करोड़ लोग दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके थे।
नितिन नवीन ने दावा किया था कि करीब तीन करोड़ लोग घुसपैठिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष ऐसे लोगों को बचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा था कि भाजपा और एनडीए के कार्यकर्ता घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
चिदंबरम ने पूछे पांच सवाल
नितिन नवीन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पांच सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा कि भाजपा अध्यक्ष जिन तीन करोड़ घुसपैठियों की बात कर रहे हैं, वे कौन हैं? क्या केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों ने उनकी पहचान कर ली है?
चिदंबरम ने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां के लोगों को पता है कि घुसपैठिए कौन हैं, तो राज्य सरकार को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए। ऐसे में सरकार उनके नाम सार्वजनिक करके उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं करती?
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि कोई भी घुसपैठियों को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा है। यदि ऐसे लोग मौजूद हैं तो उनकी पहचान होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
13.30 करोड़ नाम हटाने पर भी उठाया सवाल
चिदंबरम ने अपने सवालों में मतदाता सूची से हटाए गए नामों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि घुसपैठियों की संख्या तीन करोड़ है, तो मृत मतदाताओं को छोड़कर 13.30 करोड़ नाम हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
उन्होंने पश्चिम बंगाल का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों में से 91 से 93 प्रतिशत लोगों ने अपील के बाद राहत हासिल की। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उन लोगों को भी घुसपैठिया माना जाएगा?
SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष आमने-सामने
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान करीब 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं।
वहीं, भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है, ताकि मृत, स्थानांतरित और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।
फिलहाल, तीन करोड़ घुसपैठियों के दावे और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। चिदंबरम के पांच सवालों ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।









